
उपस्थित नहीं होने पर सुनवाई के बाद श्रीनगर की अदालत ने दिया आदेश
The live ink desk. जम्मू-कश्मीर क्रिकेट संघ (जेकेसीए) से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता मामले में नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। श्रीनगर की एक अदालत ने गुरुवार को इस मामले में उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब अदालत में सुनवाई के दौरान वे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हुए।
अदालत ने जताई नाराजगी, अगली सुनवाई 30 मार्च को
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि आरोपी पक्ष को वर्चुअल माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराने का विकल्प दिया गया था, लेकिन इस विकल्प का भी उपयोग नहीं किया गया। अदालत में अब्दुल्ला की अनुपस्थिति पर संज्ञान लेते हुए न्यायालय ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 30 मार्च को निर्धारित की गई है, जिसमें अदालत आगे की कानूनी कार्रवाई पर विचार करेगी।
जानकारी के अनुसार, सुनवाई के दिन अब्दुल्ला जम्मू में मौजूद थे। उनके अधिवक्ता ने अदालत से व्यक्तिगत पेशी से छूट की मांग करते हुए आवेदन प्रस्तुत किया था, परंतु अदालत ने इसे पर्याप्त कारण नहीं माना और वारंट जारी करने का निर्णय लिया।
जेकेसीए घोटाले से जुड़ा है मामला
यह पूरा मामला Jammu and Kashmir Cricket Association (जेकेसीए) के कार्यकाल के दौरान कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है। अब्दुल्ला वर्ष 2001 से 2011 तक इस क्रिकेट संघ के अध्यक्ष रहे थे। आरोप है कि इस अवधि में क्रिकेट के विकास के लिए जारी किए गए करोड़ों रुपये के फंड के उपयोग में गंभीर अनियमितताएं हुईं।
यह विवाद वर्ष 2012 में तब सामने आया, जब संघ के तत्कालीन कोषाध्यक्ष मंजूर वजीर ने पूर्व महासचिव मोहम्मद सलीम खान और पूर्व कोषाध्यक्ष अहसान मिर्जा के खिलाफ वित्तीय गड़बड़ी की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि संघ के खाते से बड़ी रकम संदिग्ध लेनदेन और फर्जी भुगतान के जरिए निकाली गई।
सीबीआई ने दायर की थी चार्जशीट
इस मामले की जांच Central Bureau of Investigation (सीबीआई) कर रही है। जांच एजेंसी ने वर्ष 2018 में अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। चार्जशीट के अनुसार, वर्ष 2002 से 2011 के बीच क्रिकेट ढांचे के विकास के लिए जारी की गई लगभग 43 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया।
यह राशि Board of Control for Cricket in India (बीसीसीआई) द्वारा जम्मू-कश्मीर में क्रिकेट गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए जारी किए गए 100 करोड़ रुपये से अधिक के अनुदान का हिस्सा बताई गई थी। जांच में यह भी सामने आया कि संघ के खातों से धनराशि कथित तौर पर धोखाधड़ीपूर्ण तरीके से निकाली गई और कई संदिग्ध लेनदेन किए गए।
हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई को सौंपी गई जांच
इस मामले की प्रारंभिक जांच के बाद Jammu and Kashmir High Court ने वर्ष 2015 में इसे सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया था। इसके बाद एजेंसी ने विस्तृत जांच शुरू की और संघ के कई पूर्व पदाधिकारियों के साथ-साथ फारूक अब्दुल्ला को भी आरोपपत्र में शामिल किया।
हालांकि, अब्दुल्ला ने इन सभी आरोपों को पहले भी खारिज करते हुए उन्हें राजनीतिक प्रेरित बताया है। फिलहाल यह मामला अदालत में विचाराधीन है और आगामी सुनवाई में इसके कानूनी पहलुओं पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।



