
The live ink desk. ग्रीनलैंड को लेकर सख्त रुख अपनाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेवर अब कुछ नरम पड़ते नजर आ रहे हैं। अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि वह ग्रीनलैंड के मसले पर यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी से फिलहाल पीछे हट रहा है। यह रुख नाटो महासचिव मार्क रुटे के साथ आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर भविष्य के संभावित समझौते की रूपरेखा पर सहमति बनने के बाद सामने आया है।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यदि प्रस्तावित सुरक्षा समझौता आगे बढ़ता है, तो यह न केवल अमेरिका बल्कि सभी नाटो सहयोगी देशों के हित में होगा। इसी आधार पर उन्होंने कहा कि एक फरवरी से लागू होने वाले प्रस्तावित टैरिफ फिलहाल नहीं लगाए जाएंगे। ट्रंप ने यह बात नाटो महासचिव के साथ बैठक के बाद अपने सोशल मीडिया मंच पर साझा की।
एक अन्य साक्षात्कार में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड और आर्कटिक क्षेत्र को लेकर अमेरिका और नाटो के बीच सहयोग का एक व्यापक खाका तैयार हो रहा है। उन्होंने इसे दोनों पक्षों के लिए लाभकारी करार देते हुए कहा कि इस समझ के तहत सुरक्षा, रणनीतिक हितों और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर मिलकर काम किया जाएगा।
राजनयिक सूत्रों के अनुसार, यह पहल वर्ष 1951 में हुए अमेरिकी-डेनमार्क रक्षा समझौते से आगे बढ़कर ग्रीनलैंड की सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में कदम हो सकती है। इसका मुख्य उद्देश्य रूस और चीन जैसी शक्तियों को इस रणनीतिक क्षेत्र में सैन्य या आर्थिक प्रभाव बढ़ाने से रोकना है। नाटो की प्रवक्ता एलिसन हार्ट ने भी ट्रंप और महासचिव के बीच हुई बातचीत को सकारात्मक बताते हुए कहा कि अब डेनमार्क, ग्रीनलैंड और अमेरिका के बीच संवाद को आगे बढ़ाया जाएगा।
डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने भी इस घटनाक्रम का स्वागत किया है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि अमेरिका द्वारा जबरन ग्रीनलैंड पर कब्जे की बात से पीछे हटना और यूरोप के साथ संभावित व्यापार युद्ध को टालना एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने यह भी कहा कि अब सभी पक्षों को मिलकर डेनमार्क साम्राज्य की सीमाओं का सम्मान करते हुए अमेरिका की सुरक्षा चिंताओं का समाधान तलाशना चाहिए।
इससे पहले दिन में राष्ट्रपति ट्रंप ने विश्व आर्थिक मंच की बैठक को संबोधित करते हुए कहा था कि सुरक्षा कारणों से अमेरिका को ग्रीनलैंड में निर्णायक भूमिका निभानी चाहिए। हालांकि पहली बार उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वह इस उद्देश्य के लिए सैन्य बल का इस्तेमाल नहीं करना चाहते और इसके बजाय सीधे बातचीत के रास्ते को प्राथमिकता देंगे।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में ट्रंप ने आठ यूरोपीय देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी, जिसे ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की मांग न माने जाने की स्थिति में 25 प्रतिशत तक बढ़ाने की बात कही गई थी। इस बयान से यूरोपीय राजधानियों में खलबली मच गई थी। हालांकि ताजा घटनाक्रम के बाद माना जा रहा है कि यूरोपीय देशों ने कूटनीतिक स्तर पर इस दबाव को काफी हद तक कम करने में सफलता हासिल कर ली है।

