The live ink desk. अमेरिका द्वारा हिरासत में लिए गए वेनेजुएला (Venezuelan) के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को न्यूयॉर्क के मैनहट्टन से स्थानांतरित कर ब्रुकलिन स्थित मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। यह जेल अमेरिका के सबसे सुरक्षित निरोध केंद्रों में गिनी जाती है, जहां पूर्व में कई चर्चित संघीय मामलों के आरोपी बंद रह चुके हैं।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मादुरो (President Maduro) को हेलीकॉप्टर के जरिए मैनहट्टन लाया गया, जहां से न्याय विभाग के विशेष सुरक्षा काफिले के साथ उन्हें ब्रुकलिन के डिटेंशन सेंटर भेजा गया। न्यूयॉर्क पुलिस विभाग ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पूरे ऑपरेशन को अत्यंत गोपनीय बताया है। राष्ट्रपति मादुरो को आगामी सप्ताह मैनहट्टन की एक संघीय अदालत में पेश किया जाना है, जहां उन पर ड्रग्स तस्करी और अवैध हथियारों से जुड़े गंभीर आरोपों पर सुनवाई होगी। डिटेंशन सेंटर के बाहर संघीय एजेंसियों के सशस्त्र जवानों की तैनाती बढ़ा दी गई है।
इस घटनाक्रम के विरोध में अमेरिका के कई प्रमुख शहरों—वॉशिंगटन डीसी, न्यूयॉर्क, बोस्टन, शिकागो और लॉस एंजिल्स—में प्रदर्शन देखने को मिले। कड़ाके की ठंड और बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी कार्रवाई के खिलाफ नारे लगाए। वहीं, कुछ समूहों ने मादुरो (President Maduro) की गिरफ्तारी का समर्थन करते हुए इसे न्यायिक कार्रवाई बताया। विरोध कर रहे लोगों का आरोप है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर वेनेजुएला में सैन्य हस्तक्षेप कर मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को जबरन हिरासत में लिया गया।
लॉस एंजिल्स में आयोजित प्रदर्शन के दौरान सोशलिज्म एंड लिबरेशन पार्टी के नेता कैमरन हर्ट ने अमेरिका की नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सरकार मानवीय मूल्यों की बजाय केवल आर्थिक हितों, विशेषकर डॉलर और संसाधनों, को प्राथमिकता दे रही है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले वेनेजुएला (Venezuelan) की राजधानी काराकस में अमेरिकी हवाई हमलों के बाद हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए थे, जिसके बाद अमेरिकी सुरक्षा बल राष्ट्रपति भवन में दाखिल हुए।
इस बीच, न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी ने भी राष्ट्रपति ट्रंप की आलोचना करते हुए मादुरो (President Maduro) और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी को अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। वहीं, वेनेजुएला सरकार ने आधिकारिक बयान जारी कर आरोप लगाया कि यह पूरी कार्रवाई देश के तेल और खनिज संसाधनों पर नियंत्रण हासिल करने की मंशा से की गई है।



