Hijab Issue: Iran एक शक्तिशाली पेड़, जिसे कोई हिला नहीं सकताः आयातुल्ला
नई दिल्ली (the live ink desk). ईरान (Iran) में बीते 20 दिनों से हो रहे विरोध प्रदर्शनों (protests) का दौर अनवरत जारी है। इसी सिलसिले में ईरान में हिजाब के खिलाफ (against the hijab) हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बारे में देश के सुप्रीम लीडर और धार्मिक नेता आयातुल्लाह अली खामेनेई (Supreme leader and religious leader Ayatollah Ali Khamenei) ने एक धमकी भरा संदेश जारी किया है। उन्होंने कड़ा संदेश देने के साथ ही दुनिया भर के इस्लामिक मुल्कों (Islamic countries) से एकजुटता दिखाने की गुजारिश की है।
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ईरान के सरकारी टीवी चैनल पर दिए गए अपने भाषण में जहां उन्होंने कहा कि ईरान एक शक्तिशाली पेड़ है, जिसे कोई डिगा नहीं सकता। वहीं ट्विटर पर उन्होंने मुस्लिम देशों से अपील की है कि वह एकजुट हों और साथ आएं। ईरानी मीडिया के मुताबिक सुप्रीम लीडर आयातुल्लाह अली खामेनेई ने कहा कि जो पेड़ अंकुरित होकर खड़ा हुआ था, वह एक शक्तिशाली पेड़ बन चुका है। उस पेड़ को कोई उखाड़ कर फेंक सकता है। इस बारे में किसी को सोचने की हिम्मत भी नहीं करनी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि ईरान में कुर्द महिला महासा अमीनी की मौत के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहा है। हिजाब न पहनने को लेकर महासा अमीनी को ईरानी पुलिस ने हिरासत में लिया था और अमीनी के साथ जबरदस्त तरीके से हिंसक बर्ताव किया था। खूब टॉर्चर किया गया, जिससे उसकी कुछ समय के बाद मौत हो गई थी। मालूम हो कि ईरान में 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद यह सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन हो रहा है, जो ईरानी सरकार के लिए बहुत बड़ी चुनौती बन गया है, जिसके मद्देनजर ईरान के सर्वोच्च सुप्रीम कमांडर धार्मिक नेता आयातुल्लाह अली खामेनेई को भी बयान देना पड़ रहा है।
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आयातुल्ला अली खानमेई ने अपने ट्वीट में लिखा है कि इस्लामिक देशों में एकता संभव है, लेकिन उसके लिए हमें काम करने की जरूरत है। हमारी इस्लामिक देशों के राजनेताओं और शासकों से उम्मीद खत्म नहीं हुई है, लेकिन हमारी सबसे बड़ी उम्मीद उसके अभिजात्य वर्ग से है, जिसमें इस्लामिक स्कॉलर, बुद्धिजीवी, प्रोफेसर, लेखक, समझदार प्रेस और युवा वर्ग हैं। उन्होंने कहा कि दुश्मन आज मुसलमानों के बीच में एकता नहीं चाहता है। यहूदी शासन इस क्षेत्र में कैंसर के सेल बना रहा है। ताकि इस्लाम के खिलाफ पश्चिम की दुश्मनी का केंद्र ईरान को बनाया जाए। वह हत्यारे, क्रूर यहूदियों को लेकर आए और एक फर्जी सरकार बनाकर फलस्तीनियों का दमन किया। उन्होंने कहा कि मुसलमानों के बीच एकता का मतलब है कि इस्लामिक देशों के हितों की रक्षा के लिए एक होना।
बातचीत के दौरान हम सबसे पहले दुश्मनों, दोस्तों और इस्लामिक राष्ट्रों के हितों को पहचाने की जरूरत है। उल्लेखनीय है कि ईरान में बीते कुछ दिनों में हिजाब पहनने को लेकर शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान अब तक तकरीबन 220 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। हालांकि ईरान का कहना है कि उसकी इस कार्रवाई में कोई भी प्रदर्शनकारी नहीं मारा गया है। बल्कि 25 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई है। ईरान में यह भारी विरोध-प्रदर्शन जातीय अल्पसंख्यकों वाले प्रदेशों में अधिक देखे गए हैं।
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इनमें उत्तर पश्चिमी क्षेत्र के कुर्द और दक्षिण पूर्वी बलूच शामिल हैं। वह काफी समय से ईरानी सरकार के सामने अपनी मांगें रखते रहे हैं। ईरान में मानवाधिकार समूह का कहना है कि प्रदर्शनों के खिलाफ कार्रवाई में 220 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, जिनमें नाबालिक लड़कियां भी शामिल हैं। इसी कड़ी में एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि इन विरोध-प्रदर्शनों में 23 से ज्यादा बच्चों की भी मौत हुई है। बीते दो दिनों से ईरान में सरकार के समर्थन में भी रैलियां निकाली जा रही हैं। हालांकि हिजाब पहनने को लेकर ईरान में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों को लेकर ईरान का कोई भी अधिकारी इस पर समझौता करने को तैयार नहीं है।
वहीं प्रदर्शनों को लेकर ईरान द्वारा कड़ी कार्रवाई करने से पश्चिमी मुल्क और अमेरिका ने इसकी कड़ी निंदा की है, साथ ही अमेरिका और पश्चिमी देश इस मुद्देको लेकर ईरान के अधिकारियों पर नए प्रतिबंध लगाने की तैयारी में हैं। ऐसा तब हो रहा है जब 2015 के परमाणु सौदे पर दोबारा बातचीत शुरू होने की चर्चा हो रही थी।


