भारत

एक और कश्मीरी पंडित की हत्या, घाटी में तेज हुआ विरोध प्रदर्शन

नई दिल्ली (the live ink desk). जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में कश्मीरी पंडितों की हत्या (murder of kashmiri pandits) का सिलसिला रह-रहकर जारी है। बीते 2 सालों में सात कश्मीरी पंडितों की चरमपंथियों द्वारा हत्या की जा चुकी है। ताजा मामला जम्मू कश्मीर (Jammu and Kashmir) के ही शोपियां जिले का है, जहां शनिवार को आतंकवादियों ने एक और कश्मीरी पंडित पूरन कृष्ण भट्ट (Kashmiri Pandit Pooran Krishna Bhatt) की हत्या उसके घर के बाहर कर दी।

यह भी पढ़ेंः गोरखपुर को मिलने जा रही 205 करोड़ की सौगात, प्रत्येक वार्ड में लगाई जाएंगी लाइट

कश्मीरी पंडित पूरन कृष्ण भट्ट (Kashmiri Pandit Pooran Krishna Bhatt) पेशे से किसान था। इस घटना के बाद जम्मू कश्मीर में कश्मीरी पंडितों की हत्या के विरोध में किया जा रहा विरोध-प्रदर्शन और तेज हो गया है। डीआईजी सुजीत कुमार ने कहा है कि आतंकवादी संगठन कश्मीर फ्रीडम फाइटर (केएफएफ) ने इस हत्या की जिम्मेदारी ली है। हत्या करने वाले लोगों के खिलाफ तलाशी अभियान जारी है। पूरे इलाके को सील कर दिया गया है।

यह भी पढ़ेंः पीईटीः जौनपुर, अमेठी, उन्नाव और कानपुर से धरा गया गिरोह, इंस्पेक्टर गिरफ्तार

उल्लेखनीय है कि 2020 से अब तक पूरन कृष्ण भट्ट सहित सात कश्मीरी पंडितों की आतंकवादियों द्वारा हत्या (murder of kashmiri pandits) की जा चुकी है। इस हत्या ने एक बार फिर से केंद्र सरकार के वादों पर विश्वास के बीच एक प्रश्न चिन्ह जरूर खड़ा कर दिया है। खासकर उन कश्मीरी पंडितों के लिए, जो भारत सरकार की पुनर्वास योजना के तहत घाटी में वापस आए थे और उन्हें नौकरी और घर सरकार द्वारा दिए गए थे। मालूम हो कि कश्मीरी पंडित राहुल भट्ट की बड़गाम जिले में 12 मई को हत्या के बाद बीते 5 महीनों से कश्मीरी पंडित विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके बाद 36 साल की दलित महिला टीचर रजनी बाला की 31 मई को स्कूल के सामने चरमपंथियों के द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

यह भी पढ़ेंः मजदूरी कर घर लौट रहे लोगों से भरी नाव गंगा में पलटी, दस सवार डूबे

शनिवार को आतंक का शिकार हुए पूरन कृष्ण भट्ट उन गिने-चुने लोगों में से थे, जो घाटी में 1990 के दशक में हजारों कश्मीरी पंडितों के पलायन के बावजूद घाटी में बसे रहे। पूरन कृष्ण भट्ट शोपियां में रह रहे तकरीबन 450 कश्मीरी पंडितों में से एक थे। मालूम हो कि जम्मू कश्मीर में बीते 2 सालों से भी ज्यादा समय से ऑपरेशन ऑल आउट के तहत आतंकवादियों का सफाया किया जा रहा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button