धार्मिक स्वतंत्रता एक स्वस्थ लोकतंत्र की पहचानः प्रो. फैजान मुस्तफा

स्वर्ण जयंती उत्सव में संवैधानिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत का संदेश, हमीदिया गर्ल्स’ डिग्री कॉलेज में “आंचल से परचम तक” और वार्षिक समारोह “आहंग–2025” धूमधाम से आयोजित
प्रयागराज। हमीदिया गर्ल्स’ डिग्री कॉलेज में स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित “आंचल से परचम तक” और वार्षिक समारोह “आहंग–2025” सोमवार को उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। समारोह के मुख्य अतिथि चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, पटना के वाइस चांसलर एवं पूर्व कुलपति NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद प्रो. डॉ. फैज़ान मुस्तफ़ा ने संवैधानिक अधिकारों, सांस्कृतिक विविधता और अल्पसंख्यक अधिकारों की महत्ता पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान की मूल भावना ही देश की विविधतापूर्ण संस्कृति को संरक्षण देना है। अनुच्छेद 29 प्रत्येक नागरिक वर्ग को अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति को सुरक्षित रखने का अधिकार प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता राष्ट्र के प्रति निष्ठा के विपरीत नहीं, बल्कि एक स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है।

प्रो. मुस्तफ़ा ने बताया कि भारत की अनेक क्षेत्रों—जैसे पंजाब, कश्मीर, लक्षद्वीप व पूर्वोत्तर में—हिंदू समुदाय अल्पसंख्यक है और वहाँ स्थापित हिंदू अल्पसंख्यक संस्थान शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। यह दर्शाता है कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा राष्ट्रहित में है और सामाजिक समरसता को मजबूत करती है।
भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्व
सम्मानित अतिथि इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कॉलेज कंसॉलिडेशन कमेटी के चेयरमैन प्रो. आनंद शंकर सिंह ने भारतीय संस्कृति की प्राचीनता और वैश्विक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत की दस हज़ार वर्ष पुरानी ज्ञान परंपरा विश्व कल्याण का संदेश देती है। उन्होंने एक हदीस का उल्लेख करते हुए कहा कि अरब के रेगिस्तानों में भी भारत की ज्ञान–वायु का सम्मान किया जाता था।
50 वर्ष की सेवा पर विशेष सम्मान
कॉलेज की मैनेजर श्रीमती तज़ीन एहसानुल्ला को स्वर्ण जयंती के अवसर पर 50 वर्षों की अनुकरणीय सेवा के लिए विशेष सम्मान प्रदान किया गया। उन्होंने कहा कि कॉलेज का छोटा सा पौधा आज एक विशाल वृक्ष बन चुका है, जिसकी शाखाएँ देश–दुनिया में ज्ञान का विस्तार कर रही हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रम और दास्तानगोई ने बांधा समा
कार्यक्रम की शुरुआत हम्द से हुई। छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सूफ़ियाना क़व्वाली ने सभागार में उत्साह का माहौल बना दिया। “दास्तान-ए-हमीदिया” शीर्षक से प्रस्तुत दास्तानगोई में कॉलेज की पाँच दशक लंबी यात्रा को रोचक अंदाज़ में पेश किया गया, जिसे उपस्थित अतिथियों ने खूब सराहा।
सम्मान और सूचनाएँ
इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने कॉलेज की वार्षिक पत्रिका “काविश–2025” तथा “तारीख़-ए-हमीदिया” का विमोचन किया। समारोह में 50 वर्षों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रतिभाशाली छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सिद्दीका जाबिर और डॉ. ज़रीना बेगम ने किया। धन्यवाद ज्ञापन एसोसिएट प्रोफेसर सुश्री नीरजा वर्मा ने किया।
स्वर्ण जयंती समारोह में सम्मानित छात्राएं
- टी.आर. शेरवानी मेमोरियल गोल्ड मेडल – अफीफा बानो, बी.ए. तृतीय वर्ष (कॉलेज टॉपर)
- कनीज़ ज़ोहरा मेमोरियल गोल्ड मेडल – सिदरा ख़ान, बी.कॉम तृतीय वर्ष (टॉपर)
- मसर्रत फातिमा मेमोरियल गोल्ड मेडल – सय्यदा ज़ेबाइश फ़ातिमा आबिदी, बी.वॉक (फैशन डिज़ाइनिंग) तृतीय वर्ष (टॉपर)
- प्रो. चंद्र पंत मेमोरियल गोल्ड मेडल – तस्मिया फ़ातिमा, बी.ए. तृतीय वर्ष (इतिहास) टॉपर
- आलिया बेगम मेमोरियल गोल्ड मेडल – ज़ोहरा फ़ातिमा, एम.ए. अंतिम (मीडिवल हिस्ट्री) टॉपर
- आबिदा खातून मेमोरियल गोल्ड मेडल – सारा हसन, एम.ए. अंतिम (उर्दू) टॉपर
