
नई दिल्ली. भारतीय तटरक्षक बल ने समुद्री सीमा की निगरानी के दौरान एक सुनियोजित और तकनीक-आधारित अभियान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय तेल तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में तीन विदेशी जहाजों को हिरासत में लिया गया है, जिन्हें विस्तृत जांच के लिए मुंबई बंदरगाह लाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार यह नेटवर्क अवैध तेल कारोबार के साथ-साथ बड़े पैमाने पर कर और शुल्क चोरी में भी संलिप्त था।
तटरक्षक बल के अनुसार, 5 फरवरी को मुंबई से लगभग 100 समुद्री मील पश्चिम में संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त तीन पोतों को रोका गया। इसके बाद विशेषज्ञ बोर्डिंग दलों ने जहाजों की गहन तलाशी ली। जहाजों पर मौजूद डिजिटल रिकॉर्ड, नेविगेशन डेटा और संचार उपकरणों की जांच के साथ-साथ दस्तावेजों का सत्यापन किया गया और चालक दल से लंबी पूछताछ हुई। एकत्र साक्ष्यों के आधार पर अवैध गतिविधियों की पुष्टि की गई।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि तस्करी नेटवर्क संघर्षग्रस्त क्षेत्रों से सस्ते दामों पर तेल और तेल-आधारित उत्पादों की खेप जुटाता था, जिन्हें समुद्र के रास्ते लाकर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में जहाज-से-जहाज हस्तांतरण के जरिए मोटर टैंकरों में भरा जाता था। इस पूरी प्रक्रिया में कई देशों के एजेंट और दलाल सक्रिय थे, जो समुद्र के बीच सौदे तय कर माल की खरीद-बिक्री करते थे।
तटरक्षक बल की उन्नत निगरानी प्रणालियों और डेटा विश्लेषण से भारतीय विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र के भीतर एक मोटर टैंकर की संदिग्ध गतिविधियों का पता चला। डिजिटल ट्रैकिंग और पैटर्न विश्लेषण के जरिए दो अन्य जहाजों की पहचान हुई, जो उस टैंकर की ओर बढ़ रहे थे और अवैध तेल हस्तांतरण में शामिल होने का संदेह था। इस तरीके से भारत सहित तटीय देशों को देय भारी सीमा शुल्क और करों की चोरी की जा रही थी।


भौतिक तलाशी और डिजिटल साक्ष्यों के मिलान के बाद तीनों जहाजों को जब्त कर लिया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने के लिए ये पोत बार-बार अपनी पहचान, नाम और पंजीकरण विवरण बदलते रहते थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जहाजों के मालिक विदेशी नागरिक हैं और उनके तार अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े हुए हैं।
तटरक्षक बल ने बताया कि जब्त जहाजों को मुंबई पहुंचाकर आगे की जांच के लिए सीमा शुल्क विभाग और अन्य संबंधित जांच एजेंसियों को सौंपा जाएगा, ताकि पूरे तस्करी नेटवर्क की परतें खोली जा सकें और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।


