
नई दिल्ली. भारत पर अमेरिकी आयात शुल्क में दी गई राहत को लेकर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौता देश के किसानों, मछुआरों और निर्यातकों के हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि इस समझौते पर मार्च के मध्य तक औपचारिक हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है।
शनिवार को राजधानी में आयोजित प्रेस वार्ता में मंत्री गोयल ने स्पष्ट किया कि इस समझौते के तहत भारतीय कृषि उत्पादों को अमेरिकी बाजार में शून्य शुल्क पर प्रवेश मिलेगा, जबकि अमेरिका के कृषि उत्पादों को भारत में किसी भी प्रकार की टैरिफ रियायत नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि इससे घरेलू कृषि क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।
गोयल ने यह भी दोहराया कि आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) खाद्य उत्पादों के भारत में आयात की अनुमति इस समझौते में नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि यह करार भारतीय निर्यातकों के लिए लगभग 30 ट्रिलियन डॉलर के विशाल अमेरिकी बाजार के द्वार खोलेगा। समझौते के अंतर्गत भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से लगभग 50 हजार करोड़ डॉलर मूल्य के उत्पाद आयात करने की सहमति दी है।
सेब आयात से जुड़े प्रावधानों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए वाणिज्य मंत्री ने कहा कि अमेरिका को केवल कोटा आधारित सीमित शुल्क रियायत दी गई है और भारतीय सेब उत्पादकों के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि अमेरिका से आयात होने वाले सेब पर 80 रुपये प्रति किलोग्राम का न्यूनतम आयात मूल्य और 25 प्रतिशत आयात शुल्क लागू रहेगा। इसका अर्थ यह है कि 100 रुपये प्रति किलोग्राम से कम कीमत वाले अमेरिकी सेब भारत में नहीं आ सकेंगे।
मंत्री गोयल ने कुछ वर्गों द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कुछ लोग जानबूझकर किसानों के हितों को लेकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में ऐसा कोई भी प्रावधान नहीं है जो देश के किसानों या घरेलू उत्पादकों के खिलाफ हो।
उन्होंने बताया कि इस अंतरिम समझौते के तहत अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर लगाया गया कुल 50 प्रतिशत शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। इसमें रूस से तेल आयात को लेकर भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स भी शामिल था, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है।
गोयल ने कहा कि 18 प्रतिशत का यह शुल्क दर भारत के प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कम है, जिससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बेहतर अवसर मिलेंगे। कई उत्पाद ऐसे होंगे जिन पर अब अमेरिका भेजे जाने पर कोई आयात शुल्क नहीं लगेगा, जिससे निर्यात को नई गति मिलेगी।
गौरतलब है कि भारत और अमेरिका ने शुक्रवार को अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा सार्वजनिक की थी, जिसे दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।



