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आयु छूट वापस लेने पर हाईकोर्ट सख्त, भर्ती बोर्ड से जवाब तलब

प्रयागराज (आलोक गुप्ता). सिपाही भर्ती प्रक्रिया के दौरान होमगार्ड अभ्यर्थियों को दी गई आयु-सीमा में तीन वर्ष की छूट को समाप्त किए जाने के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार और पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है। न्यायालय ने प्रकरण की अगली सुनवाई के लिए 12 फरवरी की तिथि निर्धारित की है।

यह निर्देश न्यायमूर्ति विकास बुधवार की एकलपीठ ने शिवम सिंह समेत 23 याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। मामला प्रदेश में 32,679 सिपाही एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती से संबंधित है।

याचिका में बताया गया कि राज्य सरकार ने 5 जनवरी 2026 को होमगार्ड श्रेणी के अभ्यर्थियों को अधिकतम आयु-सीमा में तीन वर्ष की छूट देने का निर्णय लिया था। इस निर्णय के आधार पर बड़ी संख्या में होमगार्ड अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में आवेदन भी कर दिया। हालांकि, इसके बाद 22 जनवरी 2026 को पुलिस भर्ती बोर्ड ने बिना पूर्व सूचना के उक्त आयु-सीमा छूट को समाप्त कर दिया, जिससे कई अभ्यर्थी अचानक अयोग्य घोषित हो गए।

याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि जब सरकार द्वारा आयु-सीमा में छूट देने का स्पष्ट निर्णय लिया जा चुका था और उसी भरोसे अभ्यर्थियों ने आवेदन किया, तब भर्ती प्रक्रिया के बीच में नियमों में इस तरह का बदलाव मनमाना और संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत है।

यह भी कहा गया कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान नियमों में अचानक संशोधन करना अभ्यर्थियों के साथ गंभीर अन्याय है और इससे उनके वैध अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से पुलिस भर्ती बोर्ड के इस निर्णय को निरस्त करने की मांग की है।

मामले की अगली सुनवाई अब 12 फरवरी को होगी, जिसमें राज्य सरकार और भर्ती बोर्ड द्वारा अपना पक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

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