
The live ink desk. रेलवे टेंडर घोटाला मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दिल्ली उच्च न्यायालय में अपनी दलीलें रखते हुए कहा कि लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ मुकदमे की कार्यवाही केवल इस आधार पर नहीं रोकी जा सकती कि अभियोजन की पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी। सीबीआई का कहना है कि इस प्रकरण में ट्रायल चलाने के लिए किसी वैधानिक अनुमति की अनिवार्यता नहीं बनती।
सीबीआई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल डीपी सिंह ने उच्च न्यायालय को बताया कि भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 19 के तहत इस मामले में अभियोजन स्वीकृति आवश्यक नहीं है। उन्होंने कहा कि इस विषय में मार्च 2020 में तत्कालीन अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से भी कानूनी राय ली गई थी। डीपी सिंह ने अदालत में तर्क दिया कि यह मामला सार्वजनिक धन के दुरुपयोग से जुड़ा है, जहां एक ओर से लाभ दिया गया और दूसरी ओर से अवैध लाभ प्राप्त किया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा।
उच्च न्यायालय में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव ने अलग-अलग याचिकाएं दाखिल कर ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप तय किए जाने के आदेश को चुनौती दी है। तीनों का कहना है कि उनके खिलाफ आरोप तय करना कानूनन उचित नहीं है और अभियोजन स्वीकृति की प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं।
गौरतलब है कि 13 अक्टूबर 2025 को राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत ने इस मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप तय किए थे। ट्रायल कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 428, 120-बी और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13(2) के तहत आरोप निर्धारित किए थे। इसी आदेश को चुनौती देते हुए आरोपितों ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया है।
ट्रायल कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने दलील दी थी कि अभियोजन के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद नहीं हैं और ऐसे में अभियोजन स्वीकृति की वैधता संदेह के घेरे में है। उन्होंने यह भी कहा था कि सीबीआई ने पहले यह रुख अपनाया कि अभियोजन अनुमति की आवश्यकता नहीं है और बाद में यह दावा किया कि अनुमति प्राप्त कर ली गई है, जो कानून के अनुरूप नहीं है।
सीबीआई ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि आरोपितों के खिलाफ ठोस और पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। एजेंसी ने अदालत को बताया कि इस मामले में पहले ही जमानत से संबंधित आदेश पारित हो चुके हैं। 28 जनवरी 2019 को ट्रायल कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को एक-एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर नियमित जमानत दी थी। इसके अलावा 19 जनवरी 2019 को सीबीआई के मामले में भी लालू प्रसाद यादव को नियमित जमानत मिल चुकी है।
ईडी द्वारा इस प्रकरण में 17 सितंबर 2018 को दाखिल चार्जशीट पर अदालत ने संज्ञान लिया था। इस केस में कुल 16 आरोपित बनाए गए हैं, जिनमें लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव के अलावा मेसर्स लारा प्रोजेक्ट एलएलपी, सरला गुप्ता, प्रेमचंद गुप्ता, गौरव गुप्ता, नाथ मल ककरानिया, राहुल यादव, विजय त्रिपाठी, देवकी नंदन तुलस्यान, मेसर्स सुजाता होटल, विनय कोचर, विजय कोचर, राजीव कुमार रेलान और मेसर्स अभिषेक फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।
सीबीआई और ईडी के अनुसार, आरोप है कि लालू प्रसाद यादव ने रेल मंत्री रहते हुए रेलवे के दो होटलों को आईआरसीटीसी को हस्तांतरित कराया और उनके संचालन व रखरखाव के लिए टेंडर जारी किए। जांच एजेंसियों का दावा है कि रांची और पुरी स्थित इन होटलों का आवंटन कोचर बंधुओं की कंपनी सुजाता होटल को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया।
अब इस मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा याचिकाओं पर सुनवाई जारी है और अदालत के आगामी आदेश पर सभी पक्षों की नजर टिकी हुई है।

