नोएडा के बाद PPGCL प्रयागराज में प्रदर्शन, सड़क पर उतरे नाराज मजदूर

लंबित मांगों के समाधान होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
प्रयागराज (आलोक गुप्ता). जिले के बारा क्षेत्र स्थित पावर प्लांट (PPGCL) में श्रमिकों का असंतोष अब गंभीर औद्योगिक विवाद का रूप लेता जा रहा है। लंबे समय से लंबित मांगों, कार्यस्थल पर कथित शोषण और प्रबंधन की उदासीनता से नाराज सैकड़ों मजदूरों ने एकजुट होकर जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्लांट परिसर के बाहर जुटे श्रमिकों ने धरना देते हुए नारेबाजी की और अपनी समस्याओं के समाधान तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया।
प्रदर्शन कर रहे मजदूरों का कहना है कि वे बीते कई महीनों से वेतन विसंगतियों, समय पर भुगतान न होने, कार्य के अत्यधिक दबाव, सुरक्षा उपकरणों की कमी और ठेका प्रथा में व्याप्त अनियमितताओं को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं।
इसके बावजूद PPGCL प्रबंधन की ओर से केवल आश्वासन दिए जाते रहे, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस सुधार नहीं हुआ। मजदूरों का आरोप है कि कई बार ज्ञापन देने और वार्ता की कोशिशों के बावजूद उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया, जिससे उनमें आक्रोश बढ़ता गया।
धरना स्थल पर मौजूद श्रमिक नेताओं ने कहा कि प्लांट (PPGCL) में कार्यरत श्रमिकों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। स्थायी और ठेका कर्मचारियों के बीच वेतन एवं सुविधाओं में भारी अंतर है, जिससे असंतोष और गहरा हो गया है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि श्रमिकों को न्यूनतम सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं और कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।
स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने तत्काल हस्तक्षेप किया। बारा उपजिलाधिकारी, नायब तहसीलदार और पुलिस बल मौके पर पहुंचे तथा कंपनी प्रबंधन के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर मजदूरों से वार्ता की।
अधिकारियों ने श्रमिकों को शांतिपूर्ण समाधान का भरोसा दिलाते हुए प्रदर्शन समाप्त करने की अपील की, लेकिन मजदूर अपनी मांगों पर अडिग रहे और लिखित आश्वासन के बिना पीछे हटने से इनकार कर दिया।
कई घंटों तक चले इस प्रदर्शन के कारण प्लांट के आसपास गतिविधियां प्रभावित रहीं और क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना रहा। स्थानीय लोगों में भी इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है।
श्रमिक संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। इसमें कार्य बहिष्कार, चक्का जाम और उच्च अधिकारियों के समक्ष बड़े स्तर पर प्रदर्शन जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं।
फिलहाल, प्रशासन और प्रबंधन के सामने चुनौती है कि वे श्रमिकों की जायज मांगों का समाधान निकालकर स्थिति को सामान्य करें, ताकि औद्योगिक उत्पादन प्रभावित न हो और क्षेत्र में शांति बनी रहे। समाचार प्रेषणतक मौके पर बारा उपजिलाधिकारी, नायब तहसीलदार बारा और टाटा कंपनी के अधिकारी मजदूरों को समझाने और प्रदर्शन खत्म कराने की कोशिश करते दिखे।
