
The live ink desk. अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी और रूस के लिए जासूसी के मामले में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे एल्ड्रिच एम्स का मैरीलैंड स्थित संघीय कारागार में निधन हो गया। 84 वर्षीय एम्स ने कंबरलैंड के फेडरल करेक्शनल इंस्टीट्यूशन में अंतिम सांस ली।
अमेरिकी जेल ब्यूरो के अनुसार एम्स सीआईए में तीन दशक से अधिक समय तक कार्यरत रहे थे। वर्ष 1985 से 1994 के बीच उन्होंने सोवियत संघ और बाद में रूस को गोपनीय सूचनाएं उपलब्ध कराईं, जिसके बदले उन्हें करीब 25 लाख डॉलर की राशि मिली। इस जासूसी प्रकरण को अमेरिकी खुफिया इतिहास के सबसे गंभीर मामलों में गिना जाता है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक एम्स की गतिविधियों के कारण अमेरिका के सौ से अधिक खुफिया अभियानों को नुकसान पहुंचा। जांच में सामने आया कि उन्होंने सीआईए और अन्य सहयोगी एजेंसियों के कई एजेंटों की पहचान उजागर की, जिनमें से अनेक को बाद में मौत की सजा दी गई। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार कम से कम नौ एजेंटों को फांसी दी गई थी।
खुफिया जगत से रहा पारिवारिक संबंध
1941 में विस्कॉन्सिन में जन्मे एम्स का पारिवारिक संबंध भी खुफिया जगत से रहा। उनके पिता स्वयं सीआईए के लिए काम कर चुके थे। एम्स ने 1960 के दशक में सीआईए में करियर की शुरुआत की और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय पदस्थापनों के बाद काउंटर इंटेलिजेंस डिवीजन में अहम जिम्मेदारी संभाली। व्यक्तिगत जीवन में आर्थिक संकट से जूझते हुए उन्होंने सोवियत खुफिया एजेंसी केजीबी से संपर्क किया और जासूसी की राह पर चले गए।
1994 में वर्जीनिया से हुई थी गिरफ्तारी
1994 में वर्जीनिया से गिरफ्तारी के बाद एम्स ने अपराध स्वीकार कर लिया था। उन्हें बिना पैरोल के आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, जबकि उनकी पत्नी को भी जेल की सजा भुगतनी पड़ी। तत्कालीन सीआईए निदेशक ने एम्स को देश के लिए घातक गद्दार करार दिया था।
एल्ड्रिच एम्स का निधन एक ऐसे अध्याय का अंत माना जा रहा है, जिसने शीत युद्ध के दौर में अमेरिकी खुफिया तंत्र को गहरी चोट पहुंचाई थी।




