
The live ink desk. पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस (Nipah Virus) के संक्रमण ने स्वास्थ्य तंत्र को सतर्क कर दिया है। बारासात स्थित एक अस्पताल में कार्यरत दो नर्सें इस घातक वायरस की चपेट में हैं और उनकी स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है। दोनों का उपचार अस्पताल के आईसीयू आइसोलेशन वार्ड में चल रहा है, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम चौबीसों घंटे निगरानी कर रही है।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, संक्रमित नर्सों में एक पूर्व बर्धमान जिले और दूसरी नदिया जिले की निवासी हैं। दोनों पांच जनवरी से अस्वस्थ थीं, जिसके बाद जांच में निपाह संक्रमण की पुष्टि हुई। फिलहाल उनकी हालत स्थिर तो है, लेकिन सुधार के संकेत भी सामने नहीं आए हैं।
संक्रमण (Nipah Virus) की रोकथाम को लेकर अस्पताल में कोविड काल की सख्त गाइडलाइनों को दोबारा प्रभावी कर दिया गया है। सभी चिकित्सकों, कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों और मरीजों के परिजनों के लिए मास्क अनिवार्य कर दिया गया है। निपाह संक्रमितों के इलाज में लगे डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी पीपीई किट पहनकर सेवाएं दे रहे हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्य को तकनीकी और चिकित्सकीय सहयोग उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय संयुक्त आउटब्रेक प्रतिक्रिया टीम तैनात की है। इस टीम में कोलकाता के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड पब्लिक हाइजीन, पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, चेन्नई के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी, एम्स कल्याणी तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के वन्यजीव विभाग के विशेषज्ञ शामिल हैं।
निपाह को लेकर जारी संक्रामक रोग अलर्ट के तहत सभी आवश्यक दिशा-निर्देश राज्य की इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (आईडीएसपी) इकाई को सौंप दिए गए हैं। वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय के लिए दिल्ली स्थित राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) का पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर सक्रिय कर दिया गया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर केंद्र की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से फोन पर बातचीत कर स्थिति की समीक्षा की और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस पूरे मामले में केंद्र सरकार द्वारा गठित संयुक्त एक्शन कमेटी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।




