
नई दिल्ली. देश के ऊर्जा क्षेत्र ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। जनवरी 2026 तक के केवल दस महीनों में भारत की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता में 52,537 मेगावाट की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। यह अब तक किसी एक वित्त वर्ष में हासिल की गई सर्वाधिक क्षमता वृद्धि मानी जा रही है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस कुल वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का रहा है। अकेले नवीकरणीय ऊर्जा से 39,657 मेगावाट क्षमता जोड़ी गई, जिसमें सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी 34,955 मेगावाट और पवन ऊर्जा की 4,613 मेगावाट रही। यह तथ्य दर्शाता है कि स्वच्छ और हरित ऊर्जा की दिशा में देश का रुझान लगातार मजबूत हो रहा है।
यह उपलब्धि पिछले वर्ष के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ती है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान देश ने 34,054 मेगावाट नई उत्पादन क्षमता जोड़ी थी, जो उस समय एक रिकॉर्ड था। लेकिन चालू वित्त वर्ष में उससे कहीं अधिक तेज़ी से क्षमता विस्तार हुआ है।
आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि 31 जनवरी 2026 तक देश की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता में 11 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। इस अवधि के अंत तक भारत की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 5,20,510.95 मेगावाट तक पहुंच गई।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेज़ वृद्धि न केवल बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने में सहायक होगी, बल्कि भारत के कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को भी मजबूती देगी। सौर और पवन ऊर्जा में हुआ यह विस्तार देश को दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ ऊर्जा भविष्य की ओर ले जाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस कुल क्षमता में विभिन्न ऊर्जा स्रोतों का योगदान इस प्रकार है—
- जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता: 2,48,541.62 मेगावाट
- गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता: 2,71,969.33 मेगावाट
- परमाणु ऊर्जा: 8,780 मेगावाट
- नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत: 2,63,189.33 मेगावाट



