
नई दिल्ली में ‘सेवा तीर्थ’ और कर्तव्य भवनों का लोकार्पण
नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राजधानी में ‘सेवा तीर्थ’ और कर्तव्य भवन-एक और दो के उद्घाटन अवसर पर देश को समर्पित करते हुए इसे ऐतिहासिक क्षण करार दिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह दिन भारत की प्रशासनिक संस्कृति में सेवा, करुणा और कर्तव्य के नए अध्याय की शुरुआत है। प्रधानमंत्री ने इस परियोजना से जुड़े प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय, विभिन्न विभागों के कर्मियों, अभियंताओं और श्रमिकों के योगदान की सराहना की।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच X पर साझा संदेशों में कहा कि ‘सेवा तीर्थ’ नागरिकों के प्रति अडिग समर्पण और ‘नागरिक देवो भव’ की भावना का मूर्त रूप है। यह परिसर कर्तव्यबोध, संवेदनशील प्रशासन और ‘भारत प्रथम’ के संकल्प का स्थायी प्रतीक बनेगा तथा आने वाली पीढ़ियों को निःस्वार्थ जनसेवा की प्रेरणा देगा।
उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री ने बताया कि ‘सेवा तीर्थ’ में उन फाइलों पर हस्ताक्षर किए गए, जो सीधे तौर पर गरीबों, वंचित वर्गों, किसानों, युवाओं और महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़ी हैं। प्रमुख निर्णयों में प्रधानमंत्री राहत (PM RAHAT) योजना को मंजूरी दी गई, जिसके तहत दुर्घटना पीड़ितों को 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध होगा, ताकि आपात स्थिति में किसी को इलाज से वंचित न रहना पड़े।
इसके साथ ही ‘लखपती दीदी’ योजना के लक्ष्य को बढ़ाकर 6 करोड़ करने का निर्णय लिया गया, जिससे महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को नया बल मिलेगा। कृषि अवसंरचना कोष को 1 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2 लाख करोड़ रुपये करने की घोषणा भी की गई, जिसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना है। स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को गति देने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के कोष के साथ ‘स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0’ को स्वीकृति दी गई, जिससे शुरुआती चरण के स्टार्टअप और डीप-टेक अनुसंधान को प्रोत्साहन मिलेगा।



प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर ‘सेवा तीर्थ’ की स्मृति में विशेष डाक टिकट और स्मारक सिक्का भी जारी किया। उन्होंने कहा कि बीते 11 वर्षों से देश गुलामी की मानसिकता से मुक्त होकर स्वतंत्र भारत की स्वतंत्र पहचान गढ़ने के अभियान में आगे बढ़ रहा है। ‘कर्तव्य’ को राष्ट्र की प्राणवायु बताते हुए उन्होंने विश्वास जताया कि ‘सेवा तीर्थ’ में लिए गए निर्णय 140 करोड़ देशवासियों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होंगे।


