
नई दिल्ली. भारतीय नौसेना ने अपनी पनडुब्बी-रोधी क्षमता को सुदृढ़ करते हुए 27 फरवरी को चेन्नई में आधुनिक युद्धपोत आईएनएस अंजदीप को औपचारिक रूप से कमीशन किया। यह पोत विशेष रूप से उथले जल क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है और तटीय सुरक्षा ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इस जहाज का नाम कर्नाटक के कारवार तट के निकट स्थित अंजदीप द्वीप के सम्मान में रखा गया है। उल्लेखनीय है कि इसी नाम का एक पूर्व युद्धपोत 2003 में सेवा से मुक्त हुआ था। वर्तमान पोत को उसका उन्नत और आधुनिक संस्करण माना जा रहा है। इसका निर्माण कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स ने किया है, जो देश के प्रमुख रक्षा शिपयार्ड्स में शामिल है।
उथले जल में संचालन की विशेष क्षमता
करीब 77 मीटर लंबा यह युद्धपोत उच्च गति वाले वाटर-जेट प्रोपल्शन सिस्टम से सुसज्जित है, जिससे यह लगभग 25 समुद्री मील की रफ्तार हासिल कर सकता है। इसकी डिजाइन ऐसी है कि यह कम गहराई वाले समुद्री क्षेत्रों में भी प्रभावी ढंग से संचालन कर सके, जहां पारंपरिक बड़े युद्धपोतों की गतिशीलता सीमित हो जाती है। तटीय क्षेत्रों में छिपी पनडुब्बियों की पहचान और उन्हें निष्क्रिय करना इसका प्राथमिक उद्देश्य है।
आधुनिक हथियार और सेंसर प्रणाली
आईएनएस अंजदीप में उन्नत हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी पनडुब्बी-रोधी रॉकेट प्रणाली और अत्याधुनिक सोनार तंत्र स्थापित किया गया है। यह सोनार प्रणाली समुद्र की गहराई में मौजूद संभावित खतरों का सटीक पता लगाने और त्वरित प्रतिक्रिया देने में सक्षम है। जहाज की युद्ध प्रणाली को बहु-आयामी समुद्री अभियानों के अनुरूप विकसित किया गया है।
बहु-भूमिका संचालन
पनडुब्बी रोधी अभियानों के अतिरिक्त यह पोत तटीय निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री सुरक्षा ऑपरेशन, खोज एवं बचाव (Search and Rescue) कार्यों तथा आवश्यकतानुसार समुद्री बारूदी सुरंगों की तैनाती जैसे कार्यों में भी उपयोगी सिद्ध होगा। इससे नौसेना की सामरिक लचीलापन क्षमता में वृद्धि होगी।
‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में कदम
युद्धपोत में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो देश की रक्षा निर्माण क्षमता और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी की उपस्थिति में इसका कमीशन होना भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण कार्यक्रम का अहम चरण माना जा रहा है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, आईएनएस अंजदीप के शामिल होने से तटीय सुरक्षा, समुद्री निगरानी और पनडुब्बी-रोधी अभियानों में भारत की परिचालन क्षमता और सुदृढ़ होगी, विशेषकर ऐसे समय में जब हिंद महासागर क्षेत्र में सामरिक गतिविधियां बढ़ रही हैं।



