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जदयू की कमान फिर नीतीश के हाथ, चौथी बार निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष बने

पटना. बिहार की राजनीति में एक बार फिर नीतीश कुमार का संगठनात्मक कद और मजबूत हुआ है। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने उन्हें लगातार चौथी बार पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया है। खास बात यह रही कि इस बार भी पूरा चुनावी प्रक्रिया निर्विरोध रही, जिससे उनके नेतृत्व पर पार्टी के भीतर पूर्ण सहमति का संकेत मिला है। नए कार्यकाल के तहत वह वर्ष 2028 तक इस पद की जिम्मेदारी निभाएंगे।

चुनाव प्रक्रिया के तहत जदयू के वरिष्ठ नेता और निर्वाचन अधिकारी अनिल हेगड़े द्वारा उन्हें प्रमाण पत्र दिया गया। इस पद के लिए केवल नीतीश कुमार ने ही नामांकन किया था, जिसके चलते मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ी और पूरी प्रक्रिया औपचारिक बनकर रह गई। यह स्थिति पार्टी के भीतर उनके निर्विवाद नेतृत्व को रेखांकित करती है।

जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के अनुसार, नीतीश कुमार ने 19 मार्च को दिल्ली स्थित पार्टी के राष्ट्रीय कार्यालय में अपना नामांकन दाखिल किया था। नामांकन पत्र दो सेटों में जमा किए गए थे। नामांकन वापसी की समय सीमा समाप्त होने तक किसी अन्य नेता ने दावेदारी पेश नहीं की, जिससे उनका निर्विरोध निर्वाचन सुनिश्चित हो गया।

यदि उनके संगठनात्मक सफर पर नजर डालें, तो नीतीश कुमार पहली बार 2016 में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे, जब शरद यादव ने पद छोड़ा था। इसके बाद 2019 में उन्हें दोबारा यह जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि 2020 में उन्होंने पद छोड़कर आरसीपी सिंह को अध्यक्ष बनाया था। बाद में राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने पार्टी की कमान संभाली, लेकिन दिसंबर 2023 में उनके इस्तीफे के बाद नीतीश कुमार ने फिर से नेतृत्व अपने हाथ में ले लिया।

लगातार बदलते संगठनात्मक समीकरणों के बीच एक बार फिर नीतीश कुमार का अध्यक्ष बनना यह दर्शाता है कि जदयू में अंतिम निर्णय की धुरी अब भी उनके इर्द-गिर्द ही घूमती है। पार्टी के भीतर स्थिरता और आगामी राजनीतिक रणनीति के लिहाज से उनका यह कार्यकाल महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


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