
The live ink desk. 11 मार्च, 2024 को लागू किए गए सीएए (नागरिकता संशोधन कानून) के तहत पहली बार 14 शरणार्थियों को देश की नागरिकता प्रदान की गई है। गृह मंत्रालय की तरफ से कहा गया कि कुल 14 लोगों को सीएए के प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं।
गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा- आज का दिन (15 मई) बहुत ही ऐतिहासिक है। दशकों का इंतजार समाप्त हुआ है और CAA के माध्यम से पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और इसाई भाई-बहनों को भारत की नागरिकता मिलनी शुरू होगई है। आजादी के समय किए गए वादे को आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरा करके दिखाया है।
गृह मंत्रालय की तरफ से कहा गया कि सीएए (CAA) के दायरे में हर एक शरणार्थी को नागरिकता की जाएगी। CAA के तहत 31 दिसंबर, 2014 से पहले पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से आए गैर मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रावधान है।
नौ राज्यों को ही नागरिकता देने का अधिकार
CAA के तहत नौ राज्यों के 30 से अधिक जिला मजिस्ट्रेट और गृह सचिवों को नागरिकता देने के अधिकार दिए गए हैं। इन राज्यों में हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली और महाराष्ट्र शामिल हैं।
साल 2021 में राज्यसभा में बताया गया था कि साल 2018, 19, 2020 और 21 में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए 3117 शरणार्थियों को नागरिकता दी गई। जबकि, गृह मंत्रालय की 2021-22 की रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर 2021 तक कुल 1414 विदेशियों को भारतीय नागरिक बनाया गया।
दिसंबर, 2019 में मिली थी राष्ट्रपति की मंजूरी
बताते चलें कि 10 दिसंबर, 2019 को सिटिजनशिप अमेंडमेंट बिल लोकसभा और उसके बाद राज्यसभा में पारित हुआ था। 12 दिसंबर, 2019 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मंजूरी मिलने के बाद सीएए कानून के रूप में अस्तित्व में आया था।
इसके पूर्व साल 2016 में CAA बिल पेश किया गया था। इसमें 1955 के कानून में कुछ बदलाव किया जना था। 12 अगस्त, 2016 को इसे संयुक्त संसदीय कमेटी के पास भेजा गया। कमेटी ने सात जनवरी, 2019 को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। दिसंबर, 2019 में राज्यसभा में पारित CAA बिल के पक्ष में 125 और विपक्ष में 99 वोट प़ड़े थे।



