फिरौती न मिलने पर अपराधियों का तांडव, व्यापारी के बेटे को उतारा मौत के घाट

अपहरण और फिरौती की घटना से बरगढ़ में उबाल, संपूर्ण बाजार बंद, सड़क पर उतरे व्यापारी
प्रयागराज/चित्रकूट (आलोक गुप्ता). प्रयागराज की सीमा से सटे चित्रकूट जनपद के बरगढ़ थाना क्षेत्र में अपराधियों ने कानून-व्यवस्था को खुली चुनौती देते हुए दिनदहाड़े एक व्यापारी के पुत्र का अपहरण कर लिया और फिरौती की मांग पूरी न होने पर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। इस जघन्य और दिल दहला देने वाली वारदात से पूरे बरगढ़ कस्बे सहित आसपास के क्षेत्र में दहशत, आक्रोश और असुरक्षा का माहौल व्याप्त है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 22 जनवरी को बरगढ़ निवासी व्यापारी अशोक केसरवानी के पुत्र आयुष केसरवानी उर्फ छोटू का सरेआम अपहरण कर लिया गया था। घटना के बाद अपहरणकर्ताओं ने परिजनों से फिरौती की मांग की। परिजनों द्वारा फिरौती की व्यवस्था न हो पाने पर अपराधियों ने आयुष की निर्मम हत्या कर दी। जब इस घटना की जानकारी सामने आई तो क्षेत्र में सनसनी फैल गई।
इस नृशंस हत्या के विरोध में बरगढ़ कस्बे में व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों ने एकजुट होकर पूर्ण रूप से बाजार बंद करा दिया। सुबह से ही सभी दुकानें और प्रतिष्ठान बंद हैं। बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि जब तक आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी कर उन्हें कड़ी से कड़ी सजा नहीं दिलाई जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने बरगढ़ थाना क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया है। भारी संख्या में पुलिस बल और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर तैनात हैं। बावजूद इसके, लोगों का आक्रोश कम होने का नाम नहीं ले रहा। जगह-जगह पुलिस बल की मौजूदगी के बीच प्रदर्शनकारी न्याय की मांग पर अड़े हुए हैं।


सूत्रों के अनुसार इस जघन्य अपराध में मोहम्मद इरफान, मोहम्मद कल्लू खान तथा उनके अन्य साथियों की संलिप्तता बताई जा रही है। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश तेज कर दी है। साथ ही मामले की हर पहलू से गहन जांच की जा रही है।
दिनदहाड़े हुई इस हत्या ने बरगढ़ सहित पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। व्यापारियों और आम नागरिकों में भय के साथ-साथ गहरा आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शीघ्र न्याय नहीं मिला और अपराधियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
