संत मर्यादा के अनुरूप नहीं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आचरण : अखाड़ा परिषद

माघ मेले को राजनीतिक मंच बनाने का आरोप, कानूनी कार्रवाई की मांग
प्रयागराज (आलोक गुप्ता). स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज और प्रशासन के बीच चल रहे विवाद पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने सख्त रुख अपनाया है। परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आचरण और वक्तव्य संत परंपरा व मर्यादा के अनुरूप नहीं हैं।
बुधवार देर रात मीडिया से बातचीत में रवींद्र पुरी महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री के प्रति जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया गया है, वह न केवल आपत्तिजनक है, बल्कि संत समाज की छवि को भी नुकसान पहुंचाने वाला है। उन्होंने कहा कि संत समाज ऐसे आचरण का समर्थन नहीं कर सकता।
अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने कुंभ, महाकुंभ और माघ मेले की परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि शाही स्नान की परंपरा केवल कुंभ और महाकुंभ से जुड़ी है, माघ मेले में इसका कोई स्थान नहीं है। इसके बावजूद माघ मेले को लेकर जिस तरह का विवाद खड़ा किया जा रहा है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है।
हिंदू समाज को बांट रहे अविमुक्तेश्वरानंद
उन्होंने आरोप लगाया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने बयानों से हिंदू समाज को बांटने का कार्य कर रहे हैं। रवींद्र पुरी महाराज ने कहा कि योगी आदित्यनाथ केवल गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के निर्वाचित मुख्यमंत्री हैं। उनके साथ-साथ देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग करना संत कहलाने वाले व्यक्ति को शोभा नहीं देता।
अखाड़ा परिषद ने यह भी आरोप लगाया कि आगामी पंचायत चुनावों को ध्यान में रखते हुए माघ मेले को राजनीतिक अखाड़े का रूप देने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के लिए आपत्तिजनक टिप्पणी को उन्होंने निंदनीय और दंडनीय अपराध बताया तथा कहा कि इस मामले में विधिक कार्रवाई होनी चाहिए। अंत में रवींद्र पुरी महाराज ने दो टूक कहा कि जो व्यक्ति सनातन विरोधी ताकतों के एजेंडे पर काम करेगा, संत समाज उसके साथ खड़ा नहीं होगा।

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