दावोस से UP कोनिवेश की सौगात, टीम योगी को मिले तीन लाख करोड़ के प्रस्ताव

लखनऊ (विजय मिश्र). स्विट्ज़रलैंड के दावोस में 19 से 23 जनवरी 2026 तक आयोजित 56वें विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक उत्तर प्रदेश के लिए निवेश के लिहाज से ऐतिहासिक साबित हुई। इस वैश्विक मंच पर प्रदेश सरकार ने लगभग 2.92 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर सहमति बनाकर उत्तर प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय निवेश मानचित्र पर सशक्त रूप से स्थापित किया है।
सम्मेलन से लौटने के बाद मंगलवार को लोक भवन सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने इस उपलब्धि की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब वैश्विक निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है और दावोस में मिली सफलता इसी का प्रमाण है।
वित्त मंत्री ने बताया कि दावोस प्रवास के दौरान उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने 119 उच्चस्तरीय बैठकों में भाग लिया, जिनमें 55 से अधिक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के शीर्ष अधिकारी शामिल रहे। इन संवादों के परिणामस्वरूप डेटा सेंटर, नवीकरणीय ऊर्जा, रक्षा उत्पादन, विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन, फूड प्रोसेसिंग, इलेक्ट्रिक वाहन, फार्मा, हेल्थकेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में 31 महत्वपूर्ण समझौते (एमओयू) संपन्न हुए।
सबसे बड़ा निवेश प्रस्ताव नीदरलैंड की कंपनी एएम-ग्रीन के साथ हुआ है। इसके तहत ग्रेटर नोएडा में एक गीगावॉट क्षमता का अत्याधुनिक एआई आधारित डेटा सेंटर स्थापित किया जाएगा, जिसमें वर्ष 2028 तक लगभग 2.10 लाख करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है। इस परियोजना से प्रदेश में डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूती मिलने के साथ बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। इसके अतिरिक्त एएसआर टेक्नोलॉजी के साथ 200 करोड़ रुपये का एमओयू हुआ, जबकि उबर ने उत्तर प्रदेश में विस्तारित मोबिलिटी सहयोग और संभावित ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर की संभावना जताई।
यूपीनेडा के निदेशक इंद्रजीत सिंह के अनुसार नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भी कई अहम करार हुए। इनमें सोलर रूफटॉप और बैटरी स्टोरेज में 1000 करोड़, हाइब्रिड इलेक्ट्रिक व्हीकल प्लांट में 1100 करोड़, सोलर पावर प्रोजेक्ट्स और मॉड्यूल निर्माण में 10,500 करोड़ तथा ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग पार्क में 3800 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव शामिल हैं। इसके साथ ही एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी के साथ ग्रीन हाइड्रोजन और नवीकरणीय ऊर्जा को लेकर सहयोग तथा आरईसी लिमिटेड द्वारा कृषि अपशिष्ट से ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 8000 करोड़ रुपये के प्रस्ताव सामने आए।
उद्योग जगत में रश्मि मेटालिक्स ने एकीकृत इस्पात संयंत्र के लिए 4000 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। वहीं एबी इनबेव, गोदरेज, फिलिप मॉरिस इंटरनेशनल और श्नाइडर इलेक्ट्रिक जैसी कंपनियों के साथ स्मार्ट फैक्ट्री, इंडस्ट्री 4.0 और सप्लाई चेन सुदृढ़ीकरण को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई। डुपोंट, रामको ग्रुप और श्नाइडर इलेक्ट्रिक के साथ जल प्रबंधन, सीवेज ट्रीटमेंट, माइक्रोग्रिड और स्मार्ट बिल्डिंग्स जैसे क्षेत्रों में साझेदारी की संभावनाओं पर मंथन हुआ।
प्रौद्योगिकी क्षेत्र में गूगल, टेक महिंद्रा, सिस्को, डेलॉइट, गूगल क्लाउड और अन्य वैश्विक कंपनियों के साथ एआई, डेटा सेंटर, डिजिटल गवर्नेंस, स्किल डेवलपमेंट और मोबिलिटी सॉल्यूशंस पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर में भी निवेश की संभावनाओं को लेकर बायर कंज्यूमर हेल्थ और अन्य कंपनियों ने रुचि दिखाई।
वित्त मंत्री ने भरोसा दिलाया कि दावोस में हुए सभी एमओयू का नियमित फॉलो-अप किया जाएगा। इनके क्रियान्वयन के लिए सिंगल विंडो व्यवस्था के तहत एक विशेष टीम गठित की जाएगी, ताकि निवेशकों को समयबद्ध अनुमतियां और सहयोग मिल सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
गौरतलब है कि “संवाद की भावना” विषय पर आयोजित इस विश्वस्तरीय सम्मेलन में 130 से अधिक देशों के करीब 3000 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 60 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष, वैश्विक उद्योगपति, नीति-निर्माता और नवाचारक शामिल थे। भारत की ओर से केंद्रीय मंत्रियों सहित 10 राज्यों ने सहभागिता की, जिसमें उत्तर प्रदेश की भूमिका सबसे प्रभावी मानी गई।

