
The live ink desk. गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार द्वारा घोषित पद्म पुरस्कारों की सूची में वर्ष 2026 के लिए तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की 11 विशिष्ट हस्तियों को स्थान मिला है। कला, विज्ञान, चिकित्सा, सहकारिता और संस्कृति के विविध क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली इन विभूतियों को दिया गया है।
इस वर्ष घोषित 131 पद्म पुरस्कारों की सूची एक बार फिर उस बदलती चयन प्रक्रिया को रेखांकित करती है, जिसमें चर्चित चेहरों के बजाय जमीनी स्तर पर निरंतर और निस्वार्थ सेवा करने वाले व्यक्तियों को प्राथमिकता दी गई है। वर्ष 2026 के पद्म सम्मानों में शोध, लोककला, स्वास्थ्य सेवाएं, महिला सशक्तिकरण और सहकारी आंदोलनों से जुड़े योगदानों को विशेष रूप से सराहा गया है।
तेलंगाना से सात हस्तियों को पद्म श्री के लिए चुना गया है। इनमें डेयरी और सहकारिता आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले रामा रेड्डी मैंगो (मरणोपरांत), मानव आनुवंशिकी के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान रखने वाले सीसीएमबी वैज्ञानिक डॉ. कुमारस्वामी थंगराज, कुचिपुड़ी नृत्य को वैश्विक मंच तक पहुंचाने वाली दीपिका रेड्डी, चिकित्सा सेवा में समर्पित डॉ. गुडुरु वेंकट राव और डॉ. पालकोंडा विजय आनंद रेड्डी, तथा विज्ञान और अनुसंधान से जुड़े चंद्रमौली गद्दामनुगु एवं कृष्णमूर्ति बालासुब्रमण्यम शामिल हैं।
आंध्र प्रदेश से चार विभूतियों को पद्म श्री प्रदान किया गया है। इस सूची में तेलुगु सिनेमा के वरिष्ठ अभिनेता और निर्माता मगंती मुरली मोहन, अन्नामाचार्य कीर्तन परंपरा को जीवंत रखने वाले प्रख्यात गायक गरिमेला बालकृष्ण प्रसाद (मरणोपरांत), लोकप्रिय अभिनेता राजेंद्र प्रसाद तथा साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वेंपटी कुटुंब शास्त्री के नाम शामिल हैं।
वर्ष 2026 का पद्म भूषण आंध्र प्रदेश के अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कैंसर विशेषज्ञ डॉ. नोरी दत्तात्रेय को प्रदान किया गया है। ब्रेकीथेरेपी के क्षेत्र में उनके नवोन्मेषी कार्यों ने विशेष रूप से सर्वाइकल और प्रोस्टेट कैंसर के उपचार में नई दिशा दी है। इंडो-अमेरिकन बसवतारकम कैंसर अस्पताल की स्थापना से लेकर आधुनिक एआई आधारित कैंसर निदान तकनीकों को भारत में प्रोत्साहित करने तक, उनका योगदान चिकित्सा विज्ञान में एक मानक के रूप में देखा जाता है।
कुल मिलाकर पद्म पुरस्कार 2026 की यह सूची प्रतिभा, समर्पण और सामाजिक दायित्व की उस परंपरा को आगे बढ़ाती है, जो राष्ट्र निर्माण में मौन लेकिन निर्णायक भूमिका निभाती है।




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