ताज़ा खबरभारत

AI के सहारे जलवायु समाधान में अग्रणी भूमिका निभाने को भारत तैयार: डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली। भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित जलवायु कार्रवाई के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन जैसी जटिल चुनौती से निपटने के लिए एआई एक प्रभावी साधन है, लेकिन इसका उपयोग मानवीय निर्णयों, संस्थागत सहयोग और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के साथ संतुलित रूप में किया जाना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (ईएससीएपी) के एशियाई एवं प्रशांत प्रौद्योगिकी हस्तांतरण केंद्र (एपीसीटीटी) और भारत सरकार के वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित “टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव 2.0” को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन कोई ऐसा विषय नहीं है, जिसे कोई एक देश अकेले संभाल सके। इसके प्रभाव वैश्विक हैं और समाधान भी सामूहिक प्रयासों से ही संभव हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि चरम मौसमी घटनाओं से निपटने और समाज में लचीलापन विकसित करने के लिए एआई को मानव अनुभव और नीति-निर्माण की समझ के साथ जोड़ा जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केवल तकनीक पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे सही दिशा देने के लिए वैश्विक सहयोग अनिवार्य है।

“जलवायु कार्रवाई और लचीलापन के लिए एआई” विषय पर केंद्रित इस कॉन्क्लेव में नवोन्मेषकों और स्टार्टअप्स की भागीदारी रही। उद्घाटन सत्र में वरिष्ठ भारतीय अधिकारी और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि शामिल हुए, जिन्होंने तकनीक, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भूमिका पर विचार साझा किए। चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि संवेदनशील क्षेत्रों में जलवायु जोखिमों से निपटने के लिए वैज्ञानिक समाधान और मजबूत नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की जरूरत है।

कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने नवाचार प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और विभिन्न देशों से आए युवा नवोन्मेषकों से संवाद किया। इसके साथ ही उन्होंने जलवायु और लचीलेपन से जुड़ी चुनौतियों के समाधान पर आधारित एआई हैकथॉन के विजेताओं को सम्मानित किया।

इस अवसर पर डीएसआईआर और एपीसीटीटी ने “संकल्प” नामक नई व्याख्यान श्रृंखला की औपचारिक शुरुआत की। इसका उद्देश्य शिक्षा जगत, उद्योग और नीति-निर्माताओं के बीच समन्वय को मजबूत करना और अनुसंधान को व्यवहारिक उपयोग में तेजी से बदलना है।

अपने संबोधन में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अलग-थलग काम करने का दौर अब समाप्त हो चुका है। जलवायु कार्रवाई के लिए विभिन्न वैज्ञानिक क्षेत्रों, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और बहु-विषयक सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नवाचार तभी सफल होगा जब उसका उद्योग, बाजार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तंत्र से निरंतर जुड़ाव रहेगा।

भारत की वैश्विक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि देश की भौगोलिक विविधता जलवायु प्रभावों के अध्ययन और अनुकूल समाधान विकसित करने में एक विशेष लाभ प्रदान करती है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विचार और समाधान साझा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने एआई को भारत के व्यापक तकनीकी रोडमैप का अहम हिस्सा बताते हुए कहा कि जिस तरह देश ने राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के जरिए उभरती तकनीकों में पहल की है, उसी तरह एआई भी जलवायु डेटा विश्लेषण, आपदा पूर्वानुमान और संसाधन प्रबंधन में परिवर्तनकारी साबित हो रहा है।

हालांकि, उन्होंने एआई के अंधाधुंध उपयोग को लेकर आगाह भी किया। मंत्री ने कहा कि पूरी तरह स्वचालित प्रणालियां कई बार जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर पातीं। इसलिए भविष्य ऐसे हाइब्रिड मॉडलों का है, जहां एआई की क्षमता और मानवीय विवेक एक-दूसरे के पूरक बनकर काम करें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button