ताज़ा खबरभारत

टेरर फंडिंग केस में इंजीनियर रशीद को झटका, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

The live ink desk. आतंकी फंडिंग मामले में आरोपों का सामना कर रहे सांसद इंजीनियर रशीद को दिल्ली उच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ ट्रायल कोर्ट द्वारा तय किए गए आरोपों को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस प्रतिभा सिंह की अध्यक्षता वाली पीठ ने साफ शब्दों में कहा कि यह याचिका सुनवाई योग्य ही नहीं है।

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) से जुड़े मामलों में आरोप तय करने का आदेश अंतरिम प्रकृति का होता है। ऐसे आदेश को एनआईए अधिनियम की धारा 21 के तहत उच्च न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती। इससे पहले भी हाई कोर्ट की एक अन्य पीठ इसी कानूनी स्थिति को स्पष्ट कर चुकी है।

हालांकि, न्यायिक कार्यवाही के समानांतर इंजीनियर रशीद को संसदीय जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए राहत मिलती रही है। पटियाला हाउस कोर्ट ने 24 जनवरी को उन्हें हिरासत में रहते हुए संसद के बजट सत्र में शामिल होने की अनुमति दी थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने रशीद को 28 जनवरी से 2 अप्रैल तक पूरे सत्र में भाग लेने की छूट दी थी। इससे पहले उन्हें उप-राष्ट्रपति चुनाव में मतदान और जुलाई–अगस्त के संसद सत्र में भागीदारी की भी अनुमति मिल चुकी है।

इंजीनियर रशीद ने लोकसभा चुनाव 2024 में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को लगभग एक लाख मतों के बड़े अंतर से पराजित कर जीत दर्ज की थी। हालांकि, उनकी कानूनी मुश्किलें पुरानी हैं। वर्ष 2016 में एनआईए ने उन्हें टेरर फंडिंग मामले में गिरफ्तार किया था।

इस मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने 16 मार्च 2022 को कई हाई-प्रोफाइल आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। इनमें हाफिज सईद, सैयद सलाहुद्दीन, यासिन मलिक, शब्बीर शाह, मसरत आलम, जहूर अहमद वताली, बिट्टा कराटे सहित कई अन्य नाम शामिल हैं। एनआईए का आरोप है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के समर्थन से लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन, जैश-ए-मोहम्मद और जेकेएलएफ जैसे आतंकी संगठनों ने जम्मू-कश्मीर में हिंसा, हमले और अशांति फैलाने की साजिश रची।

जांच एजेंसी के अनुसार, हुर्रियत कांफ्रेंस के कुछ नेताओं ने हवाला और अन्य अवैध माध्यमों से आतंकी गतिविधियों के लिए धन जुटाया। इस फंड का इस्तेमाल सुरक्षा बलों पर हमलों, आम नागरिकों को निशाना बनाने, स्कूलों को जलाने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में किया गया। इन्हीं तथ्यों के आधार पर एनआईए ने भारतीय दंड संहिता और यूएपीए की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।

हाई कोर्ट के ताजा फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि टेरर फंडिंग जैसे गंभीर मामलों में आरोप तय होने के बाद कानूनी चुनौती की राह सीमित है, और मुकदमे की आगे की प्रक्रिया ट्रायल कोर्ट में ही आगे बढ़ेगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button