The live ink desk. रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों के बीच क्रेमलिन ने एक बार फिर यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को शांति वार्ता के लिए मॉस्को आने का प्रस्ताव दिया है। रूस का यह कदम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिकी मध्यस्थता में चल रही बातचीत से किसी राजनीतिक समाधान की संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है।
क्रेमलिन के अनुसार, इस ताज़ा निमंत्रण पर कीव की ओर से अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। रूसी राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि यह प्रस्ताव पहले भी रखा गया था, लेकिन तब यूक्रेनी नेतृत्व ने इसे अस्वीकार कर दिया था। उस समय जेलेंस्की ने साफ कहा था कि जिस राजधानी से उनके देश पर लगातार हमले हो रहे हों, वहां जाकर बातचीत करना उनके लिए संभव नहीं है।
इधर, मध्य पूर्व के अबू धाबी में अमेरिका की पहल पर रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधियों के बीच हुई हालिया बैठकों ने शांति प्रयासों को कुछ गति दी है। इसी प्रक्रिया के तहत दोनों पक्षों ने युद्ध में मारे गए सैनिकों के शवों की अदला-बदली भी की है। इसके बावजूद, जमीनी हालात अब भी तनावपूर्ण हैं और यूक्रेन को हालिया मिसाइल हमलों के बाद गंभीर ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ रहा है।
वॉशिंगटन का दावा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्यक्तिगत तौर पर इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए प्रयासरत हैं और वार्ता को लेकर “सकारात्मक संकेत” मिल रहे हैं। हालांकि, समाधान की राह में अब भी कई जटिल अड़चनें बनी हुई हैं। क्षेत्रीय नियंत्रण, युद्धोत्तर सुरक्षा व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय शांति बलों की तैनाती और जापोरिज्झिया परमाणु संयंत्र का भविष्य जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के रुख एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं।
रूस जहां डोनेट्स्क क्षेत्र से यूक्रेनी सेनाओं की पूरी वापसी की मांग कर रहा है, वहीं यूक्रेन किसी भी अतिरिक्त भूभाग को छोड़ने से इनकार कर चुका है। इसी बीच, चेचन्या के नेता रमजान कादिरोव जैसे रूसी सहयोगी नेताओं की आक्रामक टिप्पणियां यह संकेत देती हैं कि शांति की कोशिशों के बावजूद युद्ध विराम अभी दूर की चुनौती बना हुआ है।



