
नई दिल्ली. सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि भारत दुर्लभ पृथ्वी खनिजों की प्राप्ति के लिए चीन पर निर्भर नहीं है। देश में समुद्रतटीय रेत खनिजों से प्राप्त मोनाजाइट दुर्लभ पृथ्वी तत्वों का प्रमुख स्रोत है, जिसमें यूरेनियम और थोरियम युक्त फॉस्फेट खनिज मौजूद होता है। इसी घरेलू संसाधन के आधार पर भारत अपनी आवश्यकताओं को पूरा कर रहा है।
परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी आईआरईएल (इंडिया) लिमिटेड देश में मोनाजाइट से उच्च शुद्धता वाले रेयर अर्थ ऑक्साइड का उत्पादन कर रही है। आईआरईएल के तीन प्रमुख केंद्रों पर खनिज रेत का एकीकृत खनन, प्रसंस्करण, निष्कर्षण और शोधन किया जाता है। सरकार का कहना है कि दुर्लभ पृथ्वी तत्वों की पूरी मूल्य श्रृंखला विकसित करने की दिशा में कई रणनीतिक कदम उठाए गए हैं।
रणनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विशाखापत्तनम में समैरियम-कोबाल्ट चुंबक निर्माण का संयंत्र शुरू किया गया है। वहीं नवीकरणीय ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए भोपाल के रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम थीम पार्क में लैंथनम, सेरियम और नियोडिमियम धातुओं के उत्पादन हेतु मिनी प्लांट स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही प्रयुक्त चुम्बकों से दुर्लभ पृथ्वी तत्वों की पुनर्प्राप्ति के लिए एक पुनर्चक्रण संयंत्र भी लगाया गया है।
सरकार ने इस क्षेत्र को मजबूत करने के लिए 26 नवंबर 2025 को 7,280 करोड़ रुपये की लागत से सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट निर्माण प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत देश में 6,000 मीट्रिक टन वार्षिक क्षमता विकसित की जाएगी, जिससे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्रों में आयात निर्भरता घटेगी। राज्यसभा में यह जानकारी केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लिखित उत्तर के माध्यम से दी।



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