
नई दिल्ली. गणतंत्र दिवस-2026 की भव्य परेड में संस्कृति मंत्रालय ने अपनी झांकी और सांस्कृतिक प्रस्तुति से दोहरा सम्मान प्राप्त कर देशभर में सुर्खियां बटोरीं। मंत्रालय की झांकी “वंदे मातरम – 150 वर्षों का सफर” को केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के बीच सर्वश्रेष्ठ झांकी का प्रथम पुरस्कार मिला। वहीं, उसकी भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुति “वंदे मातरम: भारत की शाश्वत गूंज” को कलात्मक उत्कृष्टता के लिए विशेष पुरस्कार से नवाजा गया।


झांकी ने 150 वर्षों का इतिहास जीवंत किया
पुरस्कार विजेता झांकी में वंदे मातरम के 150 वर्षों के सफर को प्रभावशाली दृश्यावली के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। इसमें दिखाया गया कि किस प्रकार यह गीत राष्ट्रीय जागरण की भावना का प्रतीक बना, स्वतंत्रता संग्राम में लोगों के हौसले को बुलंद किया और भारत की सांस्कृतिक और एकता की पहचान को आकार दिया। झांकी ने भावपूर्ण दृश्यों और प्रतीकों के माध्यम से राष्ट्रगान की शाश्वत प्रासंगिकता को दर्शाया।
सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुति ने भावनाओं को छू लिया
विशेष पुरस्कार विजेता नृत्य प्रस्तुति “वंदे मातरम – भारत की शाश्वत गूंज” का मंचन संगीत नाटक अकादमी और उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, पटियाला के सहयोग से किया गया। इस प्रस्तुति में 2,500 कलाकारों ने शास्त्रीय, लोक और आदिवासी कला रूपों के जरिए भारत की सांस्कृतिक विविधता का ज्वलंत चित्र प्रस्तुत किया। नृत्य, संगीत और मंत्रों के संयोजन ने देश की आध्यात्मिक जड़ों, स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों और सशस्त्र बलों के शौर्य को जीवंत कर दिया। प्रस्तुति का समापन राष्ट्रीय एकता, भक्ति और तिरंगे के प्रतीकात्मक गौरव के साथ हुआ।
विशेष टीम ने प्रस्तुति को बनाया यादगार
सांस्कृतिक प्रस्तुति का समग्र रचनात्मक निर्देशन डॉ. संध्या पुरेचा ने किया। ऑस्कर विजेता संगीतकार एम.एम. कीरावानी ने संगीत निर्देशन संभाला, गीतकार सुभाष सहगल ने गीत रचे, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता अनुपम खेर ने पार्श्व स्वर प्रदान किया और सुश्री संध्या रमन ने वेशभूषा की डिजाइन तैयार की। इस टीम के संयुक्त प्रयास ने गणतंत्र दिवस की परेड को और भी भव्य और यादगार बना दिया।
इस शानदार प्रदर्शन ने न केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित किया, बल्कि वंदे मातरम के अमर संदेश को वर्तमान पीढ़ी के लिए जीवंत कर दिया।

