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ऐतिहासिक उपलब्धि: भारतीय रेल के 472 किमी मार्ग पर कवच 4.0 सक्रिय

एक ही दिन में अब तक की सबसे बड़ी कमीशनिंग, पांच ज़ोन में 1,300 किमी से अधिक कवरेज

नई दिल्ली. भारतीय रेलवे ने रेल सुरक्षा को नई ऊंचाई पर ले जाते हुए स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली कवच वर्ज़न 4.0 का विस्तार तेज कर दिया है। शुक्रवार को रेलवे नेटवर्क के तीन प्रमुख खंडों में एक साथ 472.3 रूट किलोमीटर पर कवच 4.0 की शुरुआत की गई। यह उपलब्धि एक ही दिन और एक ही महीने में कवच की अब तक की सबसे बड़ी कमीशनिंग मानी जा रही है।

तीन अहम खंडों पर कवच 4.0 की शुरुआत

  • पश्चिम रेलवे का वडोदरा–विरार खंड (344 किमी),
  • उत्तर रेलवे का तुगलकाबाद जंक्शन केबिन–पलवल खंड (35 किमी) और
  • पूर्व मध्य रेलवे का मानपुर–सरमतनार खंड (93.3 किमी) शामिल हैं।
  • इन सभी खंडों पर कवच की तैनाती से उच्च-घनत्व वाले मार्गों पर ट्रेन परिचालन की सुरक्षा, विश्वसनीयता और नियंत्रण क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड

इस नई कमीशनिंग के साथ ही भारतीय रेलवे ने एक दिन में कवच 4.0 के तहत लाए गए रूट किलोमीटर का नया रिकॉर्ड बनाया है। इससे पहले सबसे बड़ा रिकॉर्ड पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा–मथुरा खंड (324 रूट किमी) का था। अब कुल मिलाकर 1,306.3 रूट किलोमीटर पर कवच 4.0 चालू हो चुका है, जबकि इससे पहले यह प्रणाली 834 रूट किलोमीटर पर संचालित थी।

व्यस्त कॉरिडोर पर बड़ा सुरक्षा उन्नयन

उत्तर रेलवे के दिल्ली–मुंबई मार्ग के चार लाइनों वाले तुगलकाबाद जंक्शन केबिन–पलवल खंड (35 किमी) पर कवच 4.0 को सफलतापूर्वक लागू किया गया है। यह खंड कुल 152 मुख्य लाइन ट्रैक किलोमीटर में फैला है और इसमें बड़े स्टेशन यार्ड, ऑटोमैटिक सिग्नलिंग तथा एब्सोल्यूट ब्लॉक सिग्नलिंग वाली लाइनें शामिल हैं। यह दिल्ली उपनगरीय और लंबी दूरी के रेल नेटवर्क के सबसे व्यस्त गलियारों में से एक है, जहां कवच की शुरुआत से परिचालन सुरक्षा और यात्री विश्वास में वृद्धि होगी।

सफल परीक्षण से प्रभावशीलता साबित

पूर्व मध्य रेलवे के पंडित दीन दयाल उपाध्याय मंडल में मानपुर–सरमतनार (93.3 किमी) खंड पर कवच 4.0 के साथ ट्रेन संचालन शुरू किया गया। इस खंड पर पहली कवच-सज्जित सेवा 13305 सासाराम इंटरसिटी एक्सप्रेस रही। यात्रा के दौरान आमने-सामने की टक्कर का परीक्षण किया गया, जिसमें ट्रेन का स्वतः रुक जाना सिस्टम की प्रभावशीलता का प्रमाण बना। यह खंड दिल्ली–हावड़ा ट्रंक मार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां भविष्य में गति क्षमता को 160 किमी प्रति घंटा तक बढ़ाने की योजना पर काम चल रहा है।

मुंबई से चली पहली कवच-सज्जित ट्रेन

दिल्ली–मुंबई मार्ग पर वडोदरा–विरार (344 किमी) खंड में कवच 4.0 को 30 जनवरी 2026 को चालू किया गया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ दादर–भुज सयाजीनगरी एक्सप्रेस (20907) मुंबई से चलने वाली पहली कवच-सज्जित ट्रेन बनी। पश्चिम रेलवे के 364 इंजनों को अब तक कवच से लैस किया जा चुका है। वहीं, वडोदरा–नागदा खंड के मार्च 2026 तक और विरार–मुंबई सेंट्रल खंड के सितंबर 2026 तक चालू होने की उम्मीद है।

क्या है कवच 4.0 सुरक्षा प्रणाली

कवच वर्ज़न 4.0 भारत की स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली का सबसे उन्नत संस्करण है। इसे परिचालन अनुभव और स्वतंत्र सुरक्षा आकलनों के आधार पर विकसित किया गया है।
अनुसंधान डिजाइन एवं मानक संगठन (RDSO) से अनुमोदित यह प्रणाली सिग्नल अनदेखी, आमने-सामने की टक्कर और मानवीय भूल जैसी दुर्घटनाओं को रोकने में सक्षम है। रेलवे के अनुसार, कवच 4.0 भारतीय रेल सुरक्षा व्यवस्था में एक निर्णायक बदलाव का प्रतीक है।

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