
नई दिल्ली. केंद्रीय बजट में आयकर की दरों में किसी भी प्रकार के बदलाव की घोषणा नहीं की गई। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पे किए जाने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि आगामी वित्त वर्ष में भी करदाताओं पर मौजूदा आयकर स्लैब ही लागू रहेंगे।
फिलहाल, एक अप्रैल, 2026 से आयकर अधिनियम, 2025 प्रभाव में आ जाएगा, जो करीब छह दशक पुराने कर कानून की जगह लेगा। हालांकि, नए कानून के लागू होने के बावजूद आयकर की दरों में कोई फेरबदल नहीं किया गया है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट मनीषधर द्विवेदी ने कहा, सरकार द्वारा आयकर करदाताओं को बड़ी राहत पिछले बजट में ही दी जा चुकी थी, इसलिए वर्तमान बजट में किसी विशेष छूट की आशा नहीं थी। वेतनभोगी कर्मचारियों के अतिरिक्त आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले करदाताओं को रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा में राहत दी गई है, जो स्वागत योग्य है। बजट को दीर्घकालीन विकास की योजनाओ को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। ओवरऑल संतुलित बजट प्रस्तुत किया गया है।
नई कर व्यवस्था में आयकर स्लैब
- 4 लाख रुपये तक की आय पर कोई कर नहीं
- 4,00,001 से 8,00,000 रुपये तक 5 प्रतिशत कर
- 8,00,001 से 12,00,000 रुपये तक 10 प्रतिशत कर
- 12,00,001 से 16,00,000 रुपये तक 15 प्रतिशत कर
- 16,00,001 से 20,00,000 रुपये तक 20 प्रतिशत कर
- 20,00,001 से 24,00,000 रुपये तक 25 प्रतिशत कर
- 24,00,001 रुपये से अधिक आय पर 30 प्रतिशत कर
पुरानी कर व्यवस्था में दरें अपरिवर्तित
- 2,50,000 रुपये तक आय पर शून्य कर
- 2,50,001 से 5,00,000 रुपये तक 5 प्रतिशत कर
- 5,00,001 से 10,00,000 रुपये तक 20 प्रतिशत कर
- 10,00,001 रुपये से अधिक आय पर 30 प्रतिशत कर
जो करदाता पुरानी कर प्रणाली को अपनाते हैं, उनके लिए आयकर स्लैब में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। कुल मिलाकर, बजट 2026-27 में आयकर दरों को लेकर सरकार ने यथास्थिति बनाए रखने का फैसला किया है। इससे करदाताओं को न तो अतिरिक्त राहत मिली और न ही किसी नए कर बोझ का सामना करना पड़ेगा।


