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देवघाट महादेवन धाम में महंत पद को लेकर तनातनी, प्रशासन ने संभाला मोर्चा

एएसपी और नायब तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों से लिए दस्तावेज, जांच के बाद होगा अंतिम निर्णय

प्रतापगढ़ (हरिश्चंद्र यादव). ऐतिहासिक बाबा देवघाट महादेवन धाम, देवघाट मोहनगंज में महंत पुजारी के अधिकार और मंदिर प्रबंधन को लेकर चल रहा विवाद अब प्रशासनिक दखल तक पहुंच गया है। बढ़ते तनाव और सुरक्षा संबंधी आशंकाओं को देखते हुए अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत राज और नायब तहसीलदार सदर स्वयं देवस्थल पहुंचे तथा दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं।

मंदिर प्रबंधन का दावा कर रहे एक पक्ष के महंत पुजारी रामानंद गिरी ने प्रशासन को बताया कि उनकी संस्था “बाबा बालेेश्वर नाथ अवध धाम सेवा संस्थान” वर्ष 2007 में विधिवत पंजीकृत हुई थी (पंजीयन संख्या एएल-22691)। उनके अनुसार यही संस्था वर्षों से मंदिर की देखरेख, नियमित पूजा-अर्चना, साफ-सफाई और विकास कार्यों का संचालन करती रही है। उन्होंने कहा कि संस्था के 13 सदस्यों में से 12 सदस्य गोसाई समुदाय से हैं, जिनकी भूमिधरी जमीन पर मंदिर और मेला क्षेत्र स्थित है।

रामानंद गिरी ने आरोप लगाया कि विरोधी पक्ष द्वारा हाल में गठित समिति के अधिकांश सदस्य बाहरी हैं और मंदिर प्रबंधन पर कब्जा करने की नीयत से संस्था बनाई गई है। उन्होंने बताया कि देवस्थान के प्राचीन नाम “बाबा देवघाट महादेवन धाम” से पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने की मांग की गई थी, जिस पर सहायक रजिस्ट्रार ने जनवरी 2026 में नाम संशोधन कर प्रमाणपत्र जारी कर दिया है।

दूसरी ओर, बृजेश कुमार गिरी ने स्वयं को मंदिर का वैध महंत पुजारी बताते हुए कहा कि वर्ष 2020 में “बाबा बालुकेश्वर नाथ चैरिटेबल ट्रस्ट, भरत धाम” नाम से ट्रस्ट गठित किया गया था और पिछले तीन वर्षों से उसी के माध्यम से पूजा-पाठ और धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं। उनका दावा है कि मंदिर की वर्तमान व्यवस्थाएं उनके ट्रस्ट द्वारा संचालित की जा रही हैं।

हालांकि, मंदिर से जुड़े अन्य पुजारियों ने बृजेश कुमार गिरी पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि दानपेटिका का ताला तोड़कर धनराशि का दुरुपयोग किया गया, मंदिर का भारी घंटा बेचा गया तथा विकास कार्यों के लिए मिले चंदे का उपयोग निजी निर्माण में किया गया। आरोप यह भी है कि पूर्व सांसद द्वारा धर्मशाला निर्माण के लिए दिए गए लगभग 12 लाख रुपये से सार्वजनिक धर्मशाला बनाने के बजाय निजी शयनकक्ष का निर्माण कराया गया।

पुजारियों ने यह भी कहा कि शिवलिंग के रजत कवच के लिए भक्तों द्वारा चढ़ाई गई चांदी की मात्रा को लेकर भी पारदर्शिता नहीं बरती गई। उनके अनुसार आवश्यकता से अधिक चांदी जमा होने के बावजूद इसे अपर्याप्त बताया जा रहा है।

मंदिर से जुड़े पुजारी देवा गिरी महाराज ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में जबरन पूजा-अर्चना और आरती की परंपरा में हस्तक्षेप किया गया तथा पूर्व समिति से जुड़े पुजारियों को किनारे किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि भूमिधरी हिस्सेदारों को नोटिस भेजकर बेदखली की कार्रवाई की जा रही है।

मौके पर पहुंचे एएसपी प्रशांत राज और नायब तहसीलदार ने दोनों पक्षों को शांत रहने की हिदायत दी और संबंधित दस्तावेज अपने पास लेकर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी। नायब तहसीलदार ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध अभिलेखों, पंजीकरण प्रमाणपत्रों और राजस्व दस्तावेजों की विधिवत समीक्षा के बाद ही यह तय किया जाएगा कि मंदिर प्रबंधन और महंत पद का वैध अधिकार किस संस्था या ट्रस्ट को प्राप्त है।

फिलहाल प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में बताते हुए कहा है कि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या कानून-व्यवस्था भंग करने की कोशिश पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। जांच पूरी होने तक मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।

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