रेलवे के निजीकरण और श्रम संहिताओं के विरोध में NCRWU–IREF का प्रदर्शन

आम हड़ताल को दिया नैतिक समर्थन, कर्मचारियों और यात्रियों के अधिकारों की रक्षा का संकल्प
प्रयागराज (आलोक गुप्ता). भारतीय रेलवे के निजीकरण, श्रमिक अधिकारों में कटौती और नई पेंशन प्रणालियों के विरोध में रेलवे कर्मचारी संगठनों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में एनसीआरडब्ल्यूयू–आईआरईएफ (NCRWU–IREF) से जुड़े रेलवे कर्मचारियों ने प्रयागराज जंक्शन के हावड़ा इंड पर शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करते हुए केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा आहूत एक दिवसीय आम हड़ताल को नैतिक समर्थन दिया।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए इंडियन रेलवे इम्प्लाइज फेडरेशन (IREF) के राष्ट्रीय संगठन महासचिव डॉ. कमल उसरी ने कहा कि रेलवे कर्मचारी औपचारिक रूप से एक दिवसीय हड़ताल में इसलिए शामिल नहीं हैं, क्योंकि इतने बड़े तंत्र में सभी कर्मचारियों की एक साथ भागीदारी व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होती। इसके बावजूद, संगठन आम हड़ताल के उद्देश्यों से पूरी तरह सहमत है और उसका नैतिक समर्थन करता है।
डॉ. उसरी ने केंद्र सरकार पर भारतीय रेलवे के निरंतर निजीकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि यह प्रक्रिया न केवल कर्मचारियों के अधिकारों को कमजोर कर रही है, बल्कि आम यात्रियों की सुविधाओं को भी प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि चारों श्रमिक संहिताएं (लेबर कोड) मेहनतकशों को अधिकार देने के बजाय उन्हें नए सिरे से गुलामी की ओर धकेलने वाले दस्तावेज हैं, जिन्हें सरकार तेजी से लागू कर रही है।
उन्होंने चिंता जताई कि देश में सबसे अधिक रोजगार उपलब्ध कराने वाले विभागों में शामिल भारतीय रेलवे में नई भर्तियां लगभग ठप कर दी गई हैं। इसके साथ ही यात्रियों को पहले उपलब्ध 52 सुविधाओं में से 36 सुविधाएं बंद कर दी गई हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। डॉ. उसरी ने स्पष्ट किया कि संगठन छात्रों, किसानों, मजदूरों और बेरोजगार युवाओं के साथ व्यापक एकता बनाकर रेलवे में नई भर्तियां शुरू कराने और यात्रियों की बंद की गई सुविधाएं पुनः बहाल कराने के लिए संघर्ष करेगा। उन्होंने दो टूक कहा कि जनता के सहयोग से रेलवे के निजीकरण को हर हाल में रोका जाएगा।
इंडियन रेलवे इम्प्लाइज फेडरेशन के महामंत्री कॉमरेड मनोज पांडेय ने अपने संबोधन में कहा कि रेलवे कर्मचारियों को एकजुट होकर एनपीएस, यूपीएस और निजीकरण के खिलाफ चल रहे आंदोलन को और तेज करना होगा। उन्होंने भरोसा जताया कि रेलवे की सुरक्षा और संरक्षा को बनाए रखते हुए पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की पुनर्बहाली के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
उन्होंने बताया कि ‘फ्रंट अगेंस्ट एनपीएस इन रेलवे’ (FANPSR) से संबद्ध एनएमओपीएस (NMOPS) के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु के नेतृत्व में देशभर में हुए आंदोलनों से सरकार पर जबरदस्त दबाव बना था। इसके बावजूद, रेलवे की मान्यता प्राप्त फेडरेशनों के कुछ नेताओं ने सरकार के साथ मिलकर एनपीएस के बाद यूपीएस को लागू करवाने में भूमिका निभाई, जिसे कर्मचारियों ने सिरे से नकार दिया है। यही कारण है कि यूपीएस विकल्प के लिए बार-बार फॉर्म भरने की अंतिम तिथि बढ़ाई जा रही है।
कॉमरेड पांडेय ने कहा कि रेलवे की सुरक्षा और संरक्षा केवल निजीकरण पर रोक लगाकर ही सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने दोहराया कि NCRWU–IREF लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से रेलवे कर्मचारियों के हक और सम्मान के लिए संघर्ष करता रहेगा।
इस कार्यक्रम में राम किशोर, दिनेश कुमार, महेंद्र, आलम, सुरेंद्र, अनंत यादव, राम स्वरूप मौर्य, संतोष द्विवेदी, दीपक वर्मा, सुरेश श्रीवास्तव, पी.एस. राय, प्रमोद राय, शिवेंद्र प्रताप सिंह सहित अनेक कर्मचारी प्रतिनिधि और पदाधिकारी मौजूद रहे। यह जानकारी इंडियन रेलवे इम्प्लाइज फेडरेशन (IREF) के राष्ट्रीय संगठन महासचिव डॉ. कमल उसरी द्वारा दी गई।



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