
मैक्रों के भारत दौरे से पहले अहम फैसला, ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत में होगा अधिकांश निर्माण
The live ink desk. भारत की वायु शक्ति को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा और रणनीतिक फैसला लिया है। भारतीय वायुसेना के लिए फ्रांस से 114 अत्याधुनिक राफेल लड़ाकू विमान खरीदे जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है, जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों शीघ्र ही भारत दौरे पर आने वाले हैं और माना जा रहा है कि उनके दौरे के दौरान इस ऐतिहासिक रक्षा सौदे को औपचारिक रूप से अंतिम रूप दिया जाएगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में साउथ ब्लॉक में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक में इस बहुप्रतीक्षित प्रस्ताव को ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (एओएन) प्रदान की गई। इसके साथ ही अब फ्रांस की विमान निर्माता कंपनी डसॉल्ट एविएशन के साथ व्यावसायिक वार्ताओं का रास्ता साफ हो गया है। सभी औपचारिक प्रक्रियाओं के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) से अंतिम मुहर लगाई जाएगी।
प्रस्तावित समझौते के तहत 114 में से 18 राफेल लड़ाकू विमान सीधे फ्रांस में निर्मित होकर भारत लाए जाएंगे, जबकि शेष 96 विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। यह निर्माण निजी भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी में होगा, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। इन विमानों में ट्विन-सीटर ट्रेनिंग वर्जन भी शामिल होंगे, जो पायलट प्रशिक्षण को और सशक्त बनाएंगे।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस मेगा डील की अनुमानित लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है, जो किसी भी एक देश के साथ भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा होगा। यह सौदा न केवल आकार में विशाल है, बल्कि तकनीकी दृष्टि से भी बेहद अहम माना जा रहा है। राफेल विमानों में 40 से 50 प्रतिशत तक स्वदेशी हथियार और प्रणालियां एकीकृत करने की अनुमति होगी, जिससे भारतीय रक्षा उद्योग को नई तकनीकी क्षमता हासिल होगी।

फिलहाल भारतीय वायुसेना के पास 36 राफेल लड़ाकू विमान पहले से सेवा में हैं। नए सौदे के पूरा होने के बाद यह संख्या बढ़कर 150 तक पहुंच जाएगी, जिससे वायुसेना की मारक क्षमता, रणनीतिक पहुंच और बहु-भूमिका संचालन क्षमता में उल्लेखनीय इजाफा होगा। हाल ही में वायुसेना के उप प्रमुख एयर मार्शल नागेश कपूर ने एक प्रेस वार्ता में बताया था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान राफेल विमानों ने पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर सटीक हमलों में निर्णायक भूमिका निभाई थी।
इस सौदे के साथ ही भारत द्वारा राफेल विमानों के कुल ऑर्डर की संख्या 186 हो जाएगी। इससे पहले भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल-एम (मरीन वर्जन) लड़ाकू विमानों का लगभग 63 हजार करोड़ रुपये का अनुबंध किया जा चुका है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि वायुसेना और नौसेना—दोनों के बेड़े में राफेल की मौजूदगी से भारत की संयुक्त सैन्य क्षमता को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड ने 16 जनवरी को ही डसॉल्ट एविएशन से 114 राफेल खरीदने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी। अब डीएसी की स्वीकृति के बाद अंतिम चरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। योजना के अनुसार, भारत में बनने वाले अधिकांश विमानों में तकनीक हस्तांतरण, डसॉल्ट–टाटा साझेदारी और स्थानीय विनिर्माण को प्राथमिकता दी जाएगी।
वायुसेना के अंबाला एयरबेस पर पहले से ही राफेल विमानों के लिए प्रशिक्षण, रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल (एमआरओ) की आधुनिक सुविधाएं कार्यरत हैं। नए विमानों की डिलीवरी चरणबद्ध तरीके से वर्ष 2030 तक पूरी होने की संभावना है। सरकार का मानना है कि यह सौदा न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि भारत को वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित होगा।



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