जौनपुर दीवानी न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी, घंटों हुई तलाशी

एक दिन पहले भी सूबे के 16 जनपदों में आई थी इसी तरह की धमकी
जौनपुर/लखनऊ. शहर के दीवानी न्यायालय परिसर में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया जब न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी मिलने की सूचना सामने आई। धमकी जिला जज की आधिकारिक वेबसाइट पर ई-मेल के माध्यम से प्राप्त हुई, जिसके बाद प्रशासनिक और पुलिस महकमे में तुरंत सक्रियता बढ़ गई।
सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस और खुफिया इकाइयों के अधिकारी न्यायालय परिसर पहुंच गए। सुरक्षा के मद्देनजर पूरे परिसर को तत्काल खाली कराया गया और प्रवेश-निकास पर सख्त निगरानी लगा दी गई। अधिवक्ताओं, वादकारियों और कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया, ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचाव सुनिश्चित किया जा सके।
इसके बाद पुलिस ने बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वायड की मदद से सघन तलाशी अभियान शुरू किया। न्यायालय की प्रत्येक अदालत कक्ष, अभिलेखागार, बार कक्ष, गलियारों तथा आसपास के खुले क्षेत्रों की बारीकी से जांच की गई। कई घंटे चले इस अभियान के दौरान किसी भी संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री की पुष्टि नहीं हुई। अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच में इसे शरारती या दहशत फैलाने की कोशिश मानते हुए साइबर ट्रेसिंग की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
सूत्रों के अनुसार, बीते दो दिनों से प्रदेश के विभिन्न जिलों में न्यायालयों को इसी प्रकार की ई-मेल धमकियां प्राप्त हो रही हैं। एक दिन पूर्व लखनऊ, अमरोहा और आजमगढ़ सहित कुल 16 जिला न्यायालयों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। उन मामलों में भी बम स्क्वायड और एंटी टेरर स्क्वायड (एटीएस) ने व्यापक तलाशी अभियान चलाया था, लेकिन कोई विस्फोटक सामग्री बरामद नहीं हुई थी।
लगातार मिल रही इन धमकियों से अधिवक्ता समुदाय में आक्रोश व्याप्त है। अधिवक्ताओं ने इसे न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करने और भय का वातावरण बनाने की साजिश बताते हुए जिम्मेदार तत्वों की शीघ्र पहचान कर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल पुलिस साइबर सेल ई-मेल के स्रोत की तकनीकी जांच में जुटी है और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि न्यायालय परिसरों की सुरक्षा में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी तथा दोषियों को चिन्हित कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


