
नई दिल्ली. रंगोत्सव होली इस वर्ष खुदरा और थोक बाजारों के लिए बड़े आर्थिक अवसर के रूप में उभरता दिख रहा है। व्यापारियों के संगठन कैट ने आकलन किया है कि देशभर में त्योहार के दौरान 80 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार हो सकता है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष दर्ज लगभग 60 हजार करोड़ रुपये के व्यापार से करीब 25 प्रतिशत अधिक है।
स्वदेशी और हर्बल उत्पादों की मांग
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री एवं चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल के अनुसार इस बार बाजारों में स्वदेशी और भारतीय निर्मित उत्पादों की मांग प्रमुख रूप से देखी जा रही है। हर्बल गुलाल, प्राकृतिक रंग, पिचकारियां, पूजन सामग्री, परिधान और अन्य घरेलू उत्पादों की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बीते वर्षों में जहां विदेशी, विशेषकर चीनी उत्पादों की हिस्सेदारी अधिक थी, वहीं अब घरेलू निर्माताओं को प्राथमिकता मिल रही है।
टिकाऊ वस्तुओं की भारी डिमांड
रंगों और पूजा सामग्री के अलावा मिठाइयों, ड्राई फ्रूट्स, गिफ्ट आइटम, रेडीमेड कपड़ों, फर्निशिंग, किराना, एफएमसीजी और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं की मांग भी तेज हुई है। कैट का अनुमान है कि अकेले दिल्ली में लगभग 15 हजार करोड़ रुपये का व्यापार हो सकता है। राजधानी के बाजारों में गुलाल, पिचकारियों और पारंपरिक मिठाई ‘गुजिया’ की बिक्री चरम पर है।
होटल, फार्महाउस, बैंक्वेट फुल
होली मिलन समारोहों की बढ़ती संख्या ने भी आतिथ्य और आयोजन क्षेत्र को गति दी है। दिल्ली में विभिन्न सामाजिक और व्यावसायिक संगठनों द्वारा हजारों कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे बैंक्वेट हॉल, होटल और फार्महाउस लगभग पूर्ण रूप से बुक हैं।
व्यापारिक समुदाय का मानना है कि भारत में त्योहार केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन देने वाले महत्वपूर्ण अवसर भी हैं, और इस वर्ष होली इसका प्रमुख उदाहरण बनकर सामने आ रही है।

