नशे की लत ने जिगरी दोस्त को बनाया हत्यारा, नशीली दवा नहीं देने पर ली थी जान
प्रतापगढ़ (the live ink desk). नशे की लत बुरी होती है। बड़े-बुजुर्गों से हम अक्सर यह सुना करते हैं। लेकिन, यकीं कोई नहीं करता। शुक्रवार को जनपद के महेशगंज थाने की पुलिस ने एक हत्याकांड का खुलासा किया। हत्याकांड का मुख्य अभियुक्त कोई और नहीं, बल्कि मृतक का जिगरी दोस्त ही था। उसी नशे की पुड़िया नहीं देने पर उस दोस्त को काल के गाल में ढकेल दिया, जिसके साथ चंद घंटे पहले नशा किया था। इस घटना से युवाओं को काफी कुछ सीखने की जरूरत है। अन्यथा, इस तरह की घटनाएं आगे भी देखने-सुनने को मिलेंगी।
बताते चलें कि तीन दिसंबर को महेशगंज थानाक्षेत्र के टांडा बाजार के समीप एक युवक का शव मिला था, जिसकी पहचान शिखर तिवारी (19) पुत्र दिनेश तिवारी (निवासी मनीपुर, लालगंज) के रूप में हुई थी। शिनाख्त होने के बाद मृतक के चाचा की तहरीर पर महेशगंज पुलिस ने धारा 302, 201, 34 के तहत सौरभ मिश्र (निवासी बाबूराय, जहांपुर, थाना संग्रामगढ़) व कुछ अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
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महेशगंज थानाध्यक्ष प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि विवेचना के दौरान एसआई विवेक कुमार मिश्र व दीपक कुमार यादव ने अपनी टीम के साथ संग्रामगढ़ क्षेत्र के ग्राम बाबूराय जहांपुर के मोड़ के पास सौरभ मिश्र पुत्र पारसनाथ मिश्र (पूरे मकसूदन का पुरवा, मजरे बाबूराय, जहांपुर, संग्रामगढ़) को बाइक के साथ गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में सौरभ मिश्र ने अपने दोस्त शिखर तिवारी की हत्या की बात स्वीकार की। उसकी निशानदेही पर दो अदद इस्तेमाल की गई सिरिंज मय निडिल व इंजेक्शन, एविल वायल की दो अदद खाली शीशी, माचिस की डिब्बी, बीड़ी का खुला पैकेट महेशगंज के टांडा बाजार के पास एक खेत से बरामद किया गया।
पूछताछ में हत्याभियुक्त ने बताया कि घटना वाली रात दोनों ने ज्यादा नशा कर लिया था और दोनों वहीं सो गए थे। रात में हत्यारोपी सौरभ की नींद खुली तो उसने फिर से नशा करने के लिए दोस्त शिखर तिवारी से इंजेक्शन मांगा, जिस पर शिखर तिवारी ने देने मना कर दिया। इसे लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ तो सौरभ मिश्र से हाथापाई हो गई और इसी में उसकी मौत हो गई।
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प्रयागराज जाकर नौकरी करना चाहते थे दोनोंः थानाध्यक्ष प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि मृतक शेखर तिवारी और हत्यारोपी सौरभ मिश्र, दोनों मित्र थे। दोनों स्मैक लती थे। 29 नवंबर हत्यारोपी सौरभ अपने दोस्त शिखर के घर गया था और शिखर के परिजनों को यह बताया कि दोनों नौकरी करने के लिए प्रयागराज जा रहे हैं। लेकिन, उस दिन प्रयागराज न जाकर सौरभ अपने दोस्त के साथ घर लौट आया। दोनों का प्लान था कि वह एक-दो दिन में प्रयागराज जाएंगे और वहां वेटर की नौकरी करेंगे। इसके बाद अगले एक-दो दिन तक दोनों टांडा बाजार के आसपास घूमते रहे और अपने नशे की लत को पूरा करते रहे। हत्यारोपी सौरभ के परिजन नोएडा में रहते हैं, इस वजह से सौरभ अपने दोस्त के साथ अपने घर पर ही रात में रहता था।
दो दिसंबर की रात भी दोनों घर से घूमने के लिए निकले थे और रात तकरीबन नौ बजे दोनों टांडा बाजार गए, जहां बाजार से कुछ दूरी पर सरपत की झाड़ी के बीच गढ्ढेनुमा जगह में दोनों ने बैठकर नशा किया और उसके बाद वहीं सो गए। इसके बाद जब सौरभ की नींद खुली तो नशे की लत ने उसने अपने ही जिगरी दोस्त का हत्यारा बना दिया।