
नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इजराइल की संसद नेसेट को संबोधित करते हुए भारत-इजराइल संबंधों को “आपसी हितों से आगे बढ़कर वैश्विक स्थिरता और समृद्धि के लिए उपयोगी साझेदारी” बताया। उन्होंने कहा कि अनिश्चितताओं से भरे वैश्विक परिदृश्य में दोनों देशों की मित्रता भरोसे और ताकत का स्तंभ बनी रहनी चाहिए।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने इजराइल में हाल में हुए आतंकी हमलों की कड़ी निंदा करते हुए स्पष्ट कहा कि निर्दोष नागरिकों की हत्या को किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने दोहरे मानदंडों से मुक्त, समन्वित और सतत वैश्विक प्रयासों के जरिए आतंकवाद के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही भारत की ओर से गाजा शांति योजना के प्रति समर्थन दोहराया और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि नेसेट को संबोधित करना उनके लिए सम्मान का विषय है। उन्होंने ऐतिहासिक संयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस दिन भारत ने 17 सितंबर 1950 को इजराइल को मान्यता दी, उसी दिन उनका जन्म हुआ था।
भारत और इजराइल के हजारों वर्ष पुराने सांस्कृतिक संबंधों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जन-से-जन संपर्क ही द्विपक्षीय रिश्तों की असली ताकत है। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत में यहूदी समुदाय को कभी उत्पीड़न या भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा और उन्होंने देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
रणनीतिक साझेदारी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले वर्षों में दोनों देशों के संबंधों का दायरा व्यापक हुआ है। भारत के विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर होने के संदर्भ में उन्होंने नवाचार, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान आधारित सहयोग को भविष्य की धुरी बताया। क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर विनिर्माण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उभरते क्षेत्रों में संयुक्त पहल की संभावनाओं को उन्होंने रेखांकित किया।
प्रधानमंत्री ने इजराइल में योग की लोकप्रियता और आयुर्वेद के प्रति बढ़ती रुचि का उल्लेख करते हुए वहां के युवाओं को भारत आकर पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों से जुड़ने का आमंत्रण दिया।

संबोधन के उपरांत प्रधानमंत्री को नेसेट का सर्वोच्च सम्मान “स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल” प्रदान किया गया। यह सम्मान पाने वाले वे पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने।
इस अवसर पर इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी के स्पष्ट और दृढ़ समर्थन की सराहना की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंधों में अभूतपूर्व प्रगति हुई है—व्यापार दोगुना, सहयोग तीन गुना और आपसी समझ कई गुना बढ़ी है। नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी की आत्मीय कूटनीतिक शैली का उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक मंचों पर उनका ‘मोदी हग’ विशेष पहचान बन चुका है।
नेतन्याहू ने यह भी रेखांकित किया कि विश्व इतिहास में भारत ऐसा देश रहा है जहां यहूदी समुदाय को भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा।


