पीएम राहत योजनाः सड़क दुर्घटना में घायलों को 1.5 लाख का कैशलेस इलाज

नई दिल्ली. सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को “गोल्डन आवर” के भीतर उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की ‘पीएम राहत’ योजना को जमीन पर उतारने की तैयारियों की गुरुवार को विस्तृत समीक्षा की गई। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में राज्यों के साथ समन्वय, तकनीकी एकीकरण और भुगतान तंत्र की प्रगति का आकलन किया गया।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, 13 फरवरी को प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई ‘पीएम राहत’ (Road Accident Victims Hospitalization and Assured Treatment) योजना के तहत प्रत्येक पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ित को अधिकतम सात दिन तक 1.5 लाख रुपये की सीमा में कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।
बैठक में विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के परिवहन एवं स्वास्थ्य मंत्री, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी तथा अन्य संबंधित पक्षों ने भाग लिया। मंत्रालय का मानना है कि ‘पीएम राहत’ योजना न केवल दुर्घटना पीड़ितों को तत्काल आर्थिक राहत देगी, बल्कि देश में सड़क सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा प्रणाली को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।
गोल्डन आवर पर फोकस
मंत्रालय ने रेखांकित किया कि देश में हर वर्ष सड़क दुर्घटनाओं में बड़ी संख्या में जानें जाती हैं। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार, यदि घायल व्यक्ति को दुर्घटना के पहले एक घंटे—जिसे ‘गोल्डन आवर’ कहा जाता है—के भीतर समुचित चिकित्सा मिल जाए, तो लगभग 50 प्रतिशत मौतें रोकी जा सकती हैं। योजना इसी महत्वपूर्ण समयखंड में त्वरित उपचार सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।
112 हेल्पलाइन से सीधा जुड़ाव
योजना को इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम 112 से जोड़ा गया है। दुर्घटना स्थल पर मौजूद कोई भी व्यक्ति, राहगीर या स्वयं पीड़ित 112 पर कॉल कर नजदीकी अस्पताल और एंबुलेंस की जानकारी प्राप्त कर सकता है। इससे प्राथमिक सूचना, एंबुलेंस डिस्पैच और अस्पताल में भर्ती की प्रक्रिया तेज होगी।
उपचार और सत्यापन की स्पष्ट रूपरेखा
योजना के प्रावधानों के अनुसार, गैर-गंभीर मामलों में 24 घंटे तक का प्रारंभिक उपचार और गंभीर मामलों में 48 घंटे तक स्थिरीकरण (स्टेबलाइजेशन) उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए पुलिस द्वारा निर्धारित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर समयबद्ध सत्यापन अनिवार्य होगा, ताकि दावों की पारदर्शिता और प्रामाणिकता बनी रहे।
पूरी प्रक्रिया को रखा जाएगा डिजिटल
योजना को तकनीक-आधारित एंड-टू-एंड डिजिटल सिस्टम के जरिए लागू किया जा रहा है। दुर्घटना की रिपोर्टिंग से लेकर अस्पताल में भर्ती, पुलिस पुष्टि, इलाज, दावा प्रस्तुतिकरण और भुगतान—सभी चरण ऑनलाइन एकीकृत रहेंगे। इससे पारदर्शिता, ट्रैकिंग और समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।
भुगतान व्यवस्था कैसे होगी
अस्पतालों को भुगतान मोटर वाहन दुर्घटना कोष से किया जाएगा। बीमित वाहनों के मामलों में संबंधित बीमा कंपनियां योगदान देंगी। हिट एंड रन अथवा बिना बीमा वाले मामलों में भुगतान केंद्र सरकार द्वारा किया जाएगा। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा अनुमोदित दावों का निस्तारण 10 दिन के भीतर किया जाएगा।
शिकायत निवारण तंत्र
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में संचालित जिला सड़क सुरक्षा समिति के अंतर्गत एक शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। इससे लाभार्थियों और अस्पतालों से जुड़े विवादों का समयबद्ध समाधान संभव होगा।



