The live ink desk. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत स्थित मुरीदके में ईद के दिन आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के वरिष्ठ कमांडर बिलाल आरिफ सराफी (Bilal Arif Sarafi) की हत्या कर दी गई। यह वारदात उस समय हुई जब वह ईद की नमाज़ अदा करने के बाद ‘मरकज तैयबा’ परिसर में मौजूद था, जिसे संगठन का प्रमुख ठिकाना माना जाता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हमलावरों ने बेहद नजदीक से सराफी (Bilal Arif Sarafi) पर गोली चलाई और उसके बाद चाकू से कई वार किए। गंभीर रूप से घायल सराफी को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हमला सुनियोजित था और पेशेवर तरीके से अंजाम दिया गया।
प्राथमिक जानकारी के मुताबिक, दो हमलावर इस घटना में शामिल थे। एक ने गोलीबारी की, जबकि दूसरे ने चाकू से हमला किया। घटना ‘मरकज तैयबा’ परिसर के अंदर हुई, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि हमलावरों को सराफी की गतिविधियों और लोकेशन की सटीक जानकारी थी।
गौरतलब है कि ‘मरकज तैयबा’ को लश्कर-ए-तैयबा का मुख्यालय माना जाता है। यह वही परिसर है, जिसे मई 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा निशाना बनाए जाने के बाद दोबारा विकसित किया गया था।
फिलहाल, हमलावरों की पहचान स्पष्ट नहीं हो सकी है। शुरुआती जांच में आंतरिक गुटबाजी या व्यक्तिगत रंजिश की आशंका जताई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां इस हत्या के पीछे के कारणों की जांच में जुटी हैं।
बताया जाता है कि बिलाल आरिफ सराफी (Bilal Arif Sarafi) वर्ष 2005 से संगठन से जुड़ा हुआ था और कथित तौर पर भर्ती तथा फंडिंग नेटवर्क संभालता था। वह युवाओं की पहचान कर उन्हें संगठन से जोड़ने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।


