कथा श्रवण से मिट जाते हैं जन्म-जन्मांतर के पापः हृदयनारायण मिश्र
श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन श्रीकृष्ण और राम के विभिन्न प्रसंग को सुन श्रद्धालु हुए भावविभोर
प्रयागराज (आलोक गुप्ता). कलयुग में श्रीमद भागवत कथा सुनने से जीव को मोक्ष की प्राप्ति होती है, साथ ही जन्म जन्मांतर के पापों का अंत हो जाता है। शंकरगढ़ के ग्राम बड़गड़ी में भागवत कथा का मर्म समझाते हुए कथावाचक हृदयनारायण मिश्र महराज ने श्रोताओं को श्रीकृष्ण के जन्म और जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का खूब वर्णन किया।
बड़गड़ी में आयोजित कथा के चौथे दिन मुख्य यमजान वंश बहादुर सिंह और श्रद्धालुओं को श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग संजीदगी के साथ सुनाया। कथावाचक ने बताया कि द्वापर युग में भोजवंशी राजा उग्रसेन मथुरा में राज करता था। उग्रसेन की पुत्री देवकी व पुत्र का नाम कंस था। देवकी का विवाह वासुदेव नामक यदुवंशी सरदार से हुआ। एक समय कंस अपनी बहन देवकी को उसकी ससुराल पहुंचाने जा रहा था। उसी समय रास्ते में आकाशवाणी हुई- ‘हे कंस, जिस देवकी को तू बड़े प्रेम से ले जा रहा है, उसी में तेरा काल बसता है। इसी के गर्भ से उत्पन्न आठवां बालक तेरा वध करेगा।
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भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि की घनघोर अंधेरी आधी रात को रोहिणी नक्षत्र में मथुरा के कारागार में वासुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्रीकृष्ण गोकुल पहुंच गए। यह तिथि उसी शुभ घड़ी की याद दिलाती है और सारे देश में बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। इस दौरान झांकी प्रस्तुत कर भगवान श्रीकृष्ण का आविर्भाव एवं जन्मोत्सव मनाया गया। कृष्ण जन्म की कथा के पूर्व भगवान राम के अवतार की लीला का वर्णन किया।
इसमें कथावाचक हृदयनारायण मिश्र ने बताया कि राजा दशरथ महारानी कौशल्या के घर जन्म हुआ भगवान श्री राम ने मर्यादा स्थापित की और मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए। राम जन्म, ताड़का वध, राम विवाह, वनवास, रावण वध सहित राम राज्याभिषेक पर सुंदर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि द्वापर में जब कंस के अत्याचार बढ़े तो श्री कृष्ण ने अवतार लेकर मुक्ति दिलाई।
महराज ने सभी श्रद्धालुओं से कहा, जीवन में सत्संग व शास्त्रों में बताए आदर्शों पर चलने से व्यक्ति का जीवन बदल जाता है। अंत में आरती कर मक्खन मिश्री के प्रसाद का भोग लगाया गया। श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ 12 मई से हुआ था और इसका समापन 19 मई को हवन-पूजन और महाप्रसाद वितरण के साथ किया जाएगा।

