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2018 में बंद हो गई थी 2000 के नोटों की छपाईः बाजार में हिस्सेदारी भी लगभग 80 फीसद घटी

The live ink desk. भारतीय बाजार में मौजूद 2000 रुपये के नोट 30 सिंतबर, 2023 के बाद चलन में नहीं रहेंगे। 19 मई, 2023 को दूसरे पहर भारतीय रिजर्व बैंक ने (RBI) 2000 रुपये के नोटों को वापस लेने की घोषणा की है। 30 सितंबर तक इन नोटों का बाजार में इस्तेमाल किया जा सकेगा। चूंकि, आरबीआई ने इसके लिए एक मियाद तय कर दी है, इस वजह से बाजार में अब लोग शायद ही 2000 रुपये की नोट स्वीकार करें।

ऐसे में होने वाली समस्या से बचने के लिए आरबीआई ने सलाह दी है कि जिनके पास 2000 रुपये के नोट हैं, वह इसे बैंक से बदल सकते हैं। एक बार में अधिकतम बीस हजार रुपये के नोट बदले जा सकेंगे या फिर अपने खाते में जमा किए जा सकेंगे। आरबीआई ने यह फैसला क्लीन नोट पालिसी के तहत लिया है। वैसे भी हाल के दो-तीन वर्षों में 2000 रुपये के नोटों काचलन काफी कम हो गया था। बाजार में गिने-चुने लोगों केपास ही आरबीआई की सबसे बड़ी नोट दिखती थी।

दो हजार रुपये की नोटों का चलन नोटबंदी (साल 2016) के बाद चलन में आया था। आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक नोटबंदी के तत्काल बाद बाजार की अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए 2016-17 में 2000 रुपये मूल्य के  350 करोड़ नोट छापे गए। इसके बाद अगले वर्ष 2017-18 में 15.1 करोड़ और 2018-19 में महज 4.7 करोड़ नोटों की छपाई हुई। हालांकि इस दरम्यान बाजार में नोट की तरलता को बनाए रखने के लिए 500 रुपये के नोट की छपाई बड़े पैमाने पर की गई। चूंकि 500 की नोट भारतीय बाजारों की अर्थव्यवस्था के काफी अनुकूल है, इस वजह से 500 रुपये की नोट ने चलन में अपना महत्वपूर्ण स्थान बना लिया और 2000 रुपये की नोट चलन से बाहर होने लगी।

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2018-19 में आखिरी बार छपे 2000 रुपये के नोट

2019-20 और 2020-21 में 2000 रुपये के नोट की छपाई भी नहीं हुई। इसका मतलब यह कि 2018-19 में आखिरी बार 2000 रुपये के नोट छापे गए थे। नोटबंदी (डिमोनिटाइजेशन) के बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने पांच सौ रुपये के साथ-साथ 200, 100, 50, 20 और 10 रुपये के नये नोट जारी किए, जो इस समय भरपूर मात्रा में चलन में मौजूद हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक ने 2018-19 में ही 2000 रुपये के नोट की छपाई बंद कर दी थी, लेकिन नकली नोटों के कारोबार ने इतनी तेजी पकड़ी कि देश की कई एजेंसियों के द्वारा 2022 तक 245.33 करोड़ रुपये के नकली नोट बरामद किए। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक 2021 में 20.21 करोड़ के नकली नोट जब्त किए गए और इससे एक वर्ष पहले 2020 में 92.17 करोड़ के 8.34 रुपये के नकली नोट बरामद हुए थे। बरामद होने वाली फेक करेंसी में अधिकतर हिस्सा 2000 रुपये की नोटों का हुआ करता है।

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50 से घटकर 13 फीसद पर पहुंची बाजार में हिस्सेदारी

साल 2022 में केंद्र सरकार ने एक सवाल के जवाब में बताया था कि 2000 रुपये के नोटों का चलन काफी कम हो गया है। बीते छह वर्ष के दौरान 2000 रुपये के 102 करोड़ नोट नष्ट किए गए। जबकि इसके बाद बचे हुए नोट सर्कुलेशन में होने चाहिए थे, लेकिन 54 करोड़ रुपये बाजार से गायब हैं। साल 2021-22 में 2000 रुपये के कुल 214.2 करोड़ नोट चलन में थे। केंद्र ने अपने जवाब में यह भी बताया था कि वित्तीय वर्, 2016-17 में 13.1 लाख करोड़ रुपये देश में चलन में थे, इसमें 2000 रुपये के नोटों की वैल्यू 6.57 लाख करोड़ (कुल प्रचलित नोटों का लगभग 50 फीसद) रुपये थी।

जबकि 2021-22 में यह घटकर 13.8 फीसद रह गई। इस समय तक देश में कुल 31.06 लाख करोड़ की वैल्यू के नोट बाजार में थे और इसमें 2000 रुपये के नोटों की हिस्सेदारी 4.28 लाख करोड़ रुपये (13.8 फीसद) तक सिमट गई थी।

2021-22 में 500 रुपये के 1280 करोड़ नोट छपे

भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार नोटबंदी के बाद अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए 2000 रुपये की नोट को बाजार में उतारा गया, लेकिन सालभर बाद ही बाजार में इसकी हिस्सेदारी कम होने लगी और इसका नतीजा यह रहा कि 2018 में ही 2000 रुपये की नोटों की छपाई बंद करने का फैसला ले लिया गया। चूंकि 2000 रुपये की नोट का इस्तेमाल भारतीय उपभोक्ताओं के उतना अनुकूल नहीं पड़ता था, इस वजह से बाजार में 500 रुपये के नोटों का चलन बढ़ने लगा।

इसके लिए आरबीआई ने 2016-17 में 500 रुपये के 726 करोड़, 2017-18 में 969 करोड़, 2018-19 में 1147 करोड़, 2019-20 में 1200 करोड़, 2020-21 में 1157 करोड़ और 2021-22 में 1280 करोड़ नोट (500) रुपये के छापे गए और बाजार में उतारे गए।

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