माघ मेलाः अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं…

कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां, शास्त्रीय और लोक कलाओं की रही धूम
प्रयागराज (आलोक गुप्ता). माघ मेला क्षेत्र के परेड सेक्टर-3 स्थित संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश के कला संगम पंडाल में बुधवार को लोक संगीत, नृत्य-नाटिका और शास्त्रीय संगीत की मनोहारी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। दिनभर चले कार्यक्रम में कला प्रेमियों ने लोक और शास्त्रीय सुरों की गंगा में डुबकी लगाई।
कार्यक्रम की शुरुआत मुंबई की प्रसिद्ध सेलिब्रिटी तबला वादक अनुराधा पाल की प्रस्तुति से हुई। ‘तबला गाए कहानियां’ शीर्षक से दी गई उनकी प्रस्तुति ने दर्शक दीर्घा को स्तब्ध कर दिया। उन्होंने तबले से डमरू की ध्वनि के साथ-साथ घरेलू जीवन के रोचक प्रसंगों को संगीतमय अंदाज में उकेरते हुए श्रोताओं से खूब वाहवाही बटोरी।


इसके बाद प्रयागराज के सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पं. प्रेम कुमार मलिक ने दरभंगा घराने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए राग भीमपलासी और राग शंकरा में शिव स्तुति एवं गंगा स्तुति प्रस्तुत की। राष्ट्रपति स्वर्ण पदक से सम्मानित मलिक की मधुर गायकी ने श्रोताओं को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया।
लोक नृत्य की कड़ी में प्रयागराज की मशहूर कलाकार बीना सिंह और उनके दल ने ढेड़िया नृत्य की सजीव प्रस्तुति दी। भगवान श्रीराम के विजय के उपरांत किए जाने वाले इस पारंपरिक नृत्य को देख दर्शक अपनी जगह से हिल नहीं सके।
भक्ति और संगीत के संगम को आगे बढ़ाते हुए प्रख्यात गायक भूपेंद्र कुमार ने “जरा हल्के गाड़ी हांकों”, “सीताराम सीताराम कहिए” जैसे भजनों और एक गजल की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण भारत की पहली संस्कृत स्तोत्र गायिका माधवी मधुकर रहीं। उन्होंने ‘त्रिवेणी स्तोत्रम’, ‘प्रयाग अष्टकम’ सहित ‘अच्युतम केशवम’ जैसे स्वरबद्ध संस्कृत स्तोत्रों का गायन कर पंडाल को आध्यात्मिक वातावरण से भर दिया। उल्लेखनीय है कि माधवी मधुकर के स्वरबद्ध स्तोत्रों को हर माह करोड़ों श्रोता सुनते हैं।
कार्यक्रम का कुशल संचालन रेनू राज ने किया। अंत में संस्कृति विभाग के अधिकारियों ने सभी कलाकारों और दलों को अंगवस्त्र एवं प्रमाण पत्र भेंट कर सम्मानित किया।
