The live ink desk. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत का युवा वर्ग न केवल राष्ट्र के विकास की अगुवाई कर रहा है, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत को भी नई ऊर्जा के साथ सहेज और सशक्त बना रहा है। उन्होंने इसे भारत की बदलती चेतना का सकारात्मक संकेत बताया।
प्रधानमंत्री यह विचार श्रीमद् विजयरत्न सुंदर सूरीश्वरजी महाराज की 500वीं कृति के विमोचन अवसर पर वीडियो संदेश के माध्यम से व्यक्त कर रहे थे। ‘प्रेमनु विश्व, विश्वनो प्रेम’ विषय पर आधारित इस ग्रंथ को उन्होंने मानवता के लिए एक मार्गदर्शक सूत्र बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत आज विश्व के सबसे युवा देशों में शामिल है और यही युवा विकसित भारत की नींव रख रहे हैं। इस परिवर्तन यात्रा में संतों, आचार्यों और उनके साहित्य की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो समाज को मूल्य, दिशा और संतुलन प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि प्रस्तुत पुस्तक केवल विचारों का संकलन नहीं, बल्कि प्रेम और सहअस्तित्व का संदेश देने वाला प्रेरक मंत्र है, जिसकी प्रासंगिकता वैश्विक तनाव और संघर्ष के दौर में और बढ़ जाती है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने जैन दर्शन के मूल सिद्धांत ‘परस्परोपग्रहो जीवनम्’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सूत्र जीवन की परस्पर निर्भरता को रेखांकित करता है। इस भावना को आत्मसात करने से व्यक्ति की सोच सीमित स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज, राष्ट्र और समूची मानवता के कल्याण की ओर अग्रसर होती है।
प्रधानमंत्री ने महाराज श्री की 500 रचनाओं को विचारों का अथाह सागर बताते हुए कहा कि इनमें समाहित आध्यात्मिक दृष्टि और मानवीय मूल्यों से आज की जटिल समस्याओं के सहज समाधान प्राप्त होते हैं।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने नवकार मंत्र दिवस पर लिए गए नौ संकल्पों को भी दोहराया, जिन्हें उन्होंने सामाजिक और राष्ट्रीय उत्थान की आधारशिला बताया। इन संकल्पों में जल संरक्षण, ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान, स्वच्छता को जनआंदोलन बनाना, स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन, भारत भ्रमण, प्राकृतिक खेती, स्वस्थ जीवनशैली, योग और खेलों को अपनाना तथा जरूरतमंदों की सहायता शामिल है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इन संकल्पों का पालन ही भारत को आत्मनिर्भर, समरस और मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण राष्ट्र बनाने की दिशा में मजबूत कदम सिद्ध होगा।



