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इज़राइल ने संयुक्त राष्ट्र समेत सात अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से नाता तोड़ा

The live ink desk. इज़राइल ने संयुक्त राष्ट्र की छह संस्थाओं सहित कुल सात अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अपने संबंध समाप्त करने की घोषणा की है। इज़राइल का आरोप है कि इन वैश्विक निकायों ने उसके प्रति लगातार पक्षपातपूर्ण और विरोधी रवैया अपनाया है। इस संबंध में मंगलवार को इज़राइल के विदेश मंत्री गिदोन सा’आर ने आधिकारिक घोषणा की।

गौरतलब है कि इससे पहले अमेरिका भी संयुक्त राष्ट्र की कई एजेंसियों समेत लगभग 68 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बाहर निकल चुका है। इज़राइल का यह कदम वैश्विक कूटनीति में एक नए तनाव की ओर संकेत कर रहा है।

यूएन संस्थाओं पर गंभीर आरोप

विदेश मंत्री गिदोन सा’आर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की कई एजेंसियां निष्पक्षता के अपने मूल दायित्व से भटक चुकी हैं। उन्होंने विशेष रूप से सात अक्टूबर को हुई घटनाओं के दौरान यौन हिंसा के मामलों की अनदेखी को लेकर संयुक्त राष्ट्र महिला संस्था (यूएन वीमन) की तीखी आलोचना की और उस पर अनावश्यक खर्च तथा राजनीतिक एजेंडे से प्रेरित कार्यशैली अपनाने का आरोप लगाया।

इन संस्थाओं से तोड़ा गया संबंध

द टाइम्स ऑफ इज़राइल के अनुसार, जिन संस्थाओं से इज़राइल ने तत्काल प्रभाव से संबंध समाप्त किए हैं, उनमें बच्चों और सशस्त्र संघर्ष के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष प्रतिनिधि का कार्यालय, यूएन वीमन, व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (यूएनसीटीएडी), पश्चिम एशिया के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (यूएनईएससीडब्ल्यूए), सभ्यताओं का संयुक्त राष्ट्र गठबंधन, संयुक्त राष्ट्र ऊर्जा तथा प्रवासन और विकास पर वैश्विक मंच (जीएफएमडी) शामिल हैं। इनमें से जीएफएमडी संयुक्त राष्ट्र की औपचारिक संस्था नहीं है।

IDF को काली सूची में डालने पर नाराज़गी

इज़राइली विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि बच्चों और सशस्त्र संघर्ष संबंधी कार्यालय के साथ सहयोग समाप्त करने का प्रमुख कारण उसकी वार्षिक रिपोर्ट है, जिसमें हमास और फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद के साथ-साथ इज़राइली रक्षा बलों (आईडीएफ) को भी काली सूची में शामिल किया गया था। इज़राइल ने इसे अस्वीकार्य और तथ्यहीन करार दिया है।

अन्य वैश्विक निकायों पर भी विचार

इज़राइली विदेश मंत्रालय ने संकेत दिए हैं कि वह भविष्य में अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ अपने संबंधों की भी समीक्षा कर सकता है। मंत्रालय का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता से समझौता करने वाले किसी भी मंच के साथ सहयोग जारी नहीं रखा जाएगा।

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