मौनी अमावस्याः दोपहर तक 3.15 करोड़ श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

प्रयागराज (आलोक गुप्ता). प्रयागराज माघ मेले के तीसरे और सबसे महत्वपूर्ण स्नान पर्व मौनी अमावस्या पर रविवार को आस्था का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ पड़ा। दोपहर 12 बजे तक करीब 3.15 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम और अन्य घाटों पर पवित्र स्नान कर पुण्य अर्जित किया।
संगम क्षेत्र में अत्यधिक दबाव, इमरजेंसी प्लान लागू
सुबह से ही संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती गई। सुबह छह बजे से दोपहर तक तीन बार संगम के प्रमुख स्नान घाट ओवरक्राउडेड घोषित करने पड़े। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने इमरजेंसी प्लान लागू करते हुए संगम जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया।


रास्ते सील, वैकल्पिक घाटों की ओर भेजे गए श्रद्धालु
भीड़ के दबाव को देखते हुए अपर संगम मार्ग पूरी तरह बंद कर दिया गया, जबकि लोअर संगम और अन्य मार्गों पर दो किलोमीटर पहले ही बैरिकेडिंग कर श्रद्धालुओं को रोका गया। संगम क्षेत्र को खाली कराने के लिए घुड़सवार पुलिस, सिविल पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स को तैनात किया गया। मेले के दबाव को कम करने के लिए पांटून पुल संख्या एक को भी खोला गया, जिसका सामान्य दिनों में उपयोग नहीं किया जाता।
पुल बंद होने से परेशानी, दारागंज-झूंसी मार्ग प्रभावित
भीड़ नियंत्रण के चलते पीपा पुल संख्या चार को बंद किए जाने से झूंसी और दारागंज की ओर दबाव बढ़ गया। दारागंज को मेला क्षेत्र से जोड़ने वाला पांटून पुल भी बीच-बीच में बंद किया गया, जिससे वेणी माधव मंदिर मार्ग पर लंबा जाम लग गया। पुल बंद होने से नाराज भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने धरना भी दिया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसी कारण पुलों को अस्थायी रूप से बंद किया गया है। श्रद्धालुओं को 800 मीटर लंबे एरावत घाट सहित अन्य वैकल्पिक घाटों की ओर भेजा जा रहा है।

शंकराचार्य को संगम जाने से रोका गया, नोकझोंक
श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ को देखते हुए पुलिस ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को संगम जाने से रोक दिया। इस दौरान पुलिस और शंकराचार्य के शिष्यों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई और अफसरों से भी तीखी बहस हुई। बताया गया कि पुलिस ने शंकराचार्य से रथ से उतरकर पैदल जाने का आग्रह किया था, लेकिन शिष्यों ने आगे बढ़ने का प्रयास किया। फिलहाल शंकराचार्य वापस लौटने से इनकार कर रहे हैं और अधिकारी उन्हें समझाने में जुटे हैं।
संगम समेत सभी घाटों पर उमड़ा आस्था का सैलाब
मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर संगम तट के साथ-साथ मेला क्षेत्र में बनाए गए सभी स्नान घाटों पर श्रद्धालु दिनभर डुबकी लगाते रहे। तड़के सुबह संगम तट पर अत्यधिक भीड़ के चलते पुलिस और प्रशासन को स्थिति संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। हालांकि पूर्व निर्धारित योजना और सतर्कता के चलते स्नान व्यवस्था को सुरक्षित रूप से संचालित किया गया।
जल-थल-नभ से अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था
माघ मेले के दौरान पूरे मेला क्षेत्र में जल, थल और नभ से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। हजारों की संख्या में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों के साथ-साथ ड्रोन कैमरों से भी लगातार निगरानी की जा रही है। मेलाधिकारी ऋषि राज, एसपी मेला नीरज पांडेय, एडीएम और कई मजिस्ट्रेट स्वयं मौके पर डटे रहकर सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की निगरानी कर रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी तत्परता से संचालित की जा रही हैं।

