बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार पर हस्तक्षेप करे केंद्र सरकार: नरेंद्रानंद सरस्वती

प्रयागराज (आलोक गुप्ता). बांग्लादेश में हिन्दुओं सहित अन्य गैर-मुस्लिम समुदायों पर हो रहे कथित अत्याचारों को लेकर काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान हालात में केंद्र की मोदी सरकार को आगे आकर स्पष्ट और प्रभावी हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि वहां रह रहे सनातनी और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
मौनी अमावस्या के अवसर पर माघ मेला क्षेत्र स्थित शंकराचार्य मार्ग पर अपने शिविर में ‘हिन्दुस्थान समाचार’ से बातचीत के दौरान शंकराचार्य ने कहा कि बांग्लादेश में केवल हिन्दू ही नहीं, बल्कि ईसाई, यहूदी, बौद्ध सहित अन्य गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यक भी उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस गंभीर मानवीय संकट पर अमेरिका, रूस, चीन जैसे शक्तिशाली देशों के साथ-साथ वैश्विक मानवाधिकार संगठनों की चुप्पी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि बांग्लादेश में सनातन धर्म को मानने वालों की संख्या लगभग एक करोड़ दस लाख है। ऐसे में यदि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो वहां हिन्दुओं का अस्तित्व ही संकट में पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी आबादी की रक्षा के लिए संगठित और सशक्त सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है।
शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने केंद्र सरकार को आगाह करते हुए कहा कि यदि हालात में शीघ्र सुधार नहीं हुआ और सनातनियों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो नागा संन्यासी, साधु-संत और सनातन धर्म के रक्षक स्वयं बांग्लादेश की ओर कूच करने को विवश हो सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार को समय रहते कूटनीतिक अथवा आवश्यक कार्रवाई कर इस स्थिति का समाधान करना चाहिए।
