अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान से नहीं रोका गया : मेला प्रशासन

भारी भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा को देखते हुए रथ ले जाने की अनुमति नहीं दी गई
प्रयागराज (आलोक गुप्ता). मौनी अमावस्या का प्रमुख स्नान पर्व प्रयागराज में सकुशल और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने के बाद मेला प्रशासन ने उत्पन्न हुए विवाद पर स्थिति स्पष्ट की है। सोमवार को आई-ट्रिपल सी स्थित मेला प्राधिकरण के सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रयागराज मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज को स्नान करने से नहीं रोका गया, बल्कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए संगम नोज पर वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध लगाया गया था।
मंडलायुक्त ने बताया कि संगम नोज क्षेत्र में अत्यधिक भीड़ के कारण किसी भी प्रकार के वाहन को ले जाने की अनुमति नहीं थी। इसके बावजूद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज अपने शिष्यों और भक्तों के साथ पीपापुल संख्या दो की बैरिकेडिंग हटाकर वाहन से संगम नोज पहुंचे। उस समय वहां श्रद्धालुओं का भारी दबाव था। प्रशासन की ओर से उनसे केवल इतना अनुरोध किया गया कि वे वाहन छोड़कर पैदल अपने शिष्यों के साथ स्नान करें।
उन्होंने बताया कि संगम नोज पर तैनात पुलिस अधिकारियों ने लगभग तीन घंटे तक महाराज से विनम्रता पूर्वक अनुरोध किया और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए मार्ग को खाली भी रखा गया। जब महाराज स्नान के लिए आगे नहीं बढ़े, तब भीड़ और सुरक्षा को देखते हुए वाहन को वहां से हटाया गया।
वीआईपी सुविधा न देने का लिया गया निर्णय
माघ मेलाधिकारी ऋषिराज ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय के 18 अक्टूबर 2022 के आदेश के अनुपालन में महत्वपूर्ण स्नान पर्वों पर किसी भी व्यक्ति को वीआईपी सुविधा प्रदान नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज को शंकराचार्य के नाम से कोई शिविर आवंटित नहीं किया गया है, क्योंकि उन्हें ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य मानने का मामला न्यायालय में विचाराधीन है। प्रशासन की ओर से उन्हें बद्रीकाश्रम के नाम से भूमि आवंटित की गई है। ऐसे में उन्हें वीवीआईपी सुविधा देने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता।
मेला प्रशासन ने दोहराया कि सभी साधु-संतों का सम्मान किया जाता है, लेकिन मौनी अमावस्या जैसे प्रमुख स्नान पर्व पर किसी को भी परंपरा से हटकर विशेष सुविधा नहीं दी जा सकती। अधिकारियों ने कहा कि प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा है और किसी भी प्रकार की चूक से भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती थी।
आरोपों से किया इनकार, जांच के आदेश
इसी क्रम में जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा और पुलिस आयुक्त प्रयागराज जोगेंद्र कुमार ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज को स्नान से रोके जाने के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने बताया कि महाराज से बार-बार पैदल स्नान करने का अनुरोध किया गया था। यदि इस दौरान उनके शिष्यों के साथ किसी प्रकार की कोई घटना हुई है, तो उसकी जांच कराई जाएगी और साक्ष्यों के आधार पर विधिक कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि पूरी घटना की विस्तृत जांच कराई जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर सभी वैधानिक कदम उठाए जाएंगे।

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