स्नान की अनुमति मिलने तक रथ से नहीं उतरेंगेः शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद

मौनी अमावस्या पर स्नान के लिए जाते समय संगम मार्ग पर रोका गया था रथ और काफिला
प्रयागराज (आलोक गुप्ता). मौनी अमावस्या के पावन स्नान को लेकर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज और पुलिस प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। प्रशासनिक रवैये से असंतुष्ट शंकराचार्य अपने शिविर के बाहर पालकी पर विराजमान हैं और उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि स्नान की अनुमति मिलने तक वे न तो पालकी से उतरेंगे और न ही शिविर में प्रवेश करेंगे।
शंकराचार्य ने कहा कि यदि उन्हें संगम स्नान से वंचित किया गया तो वे मेला क्षेत्र से प्रस्थान कर जाएंगे और भविष्य में कभी यहां शिविर नहीं लगाएंगे। उन्होंने मेला व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अब यह आयोजन संत-समाज और सनातन परंपरा के अनुरूप नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस-प्रशासन और विशेष वर्गों तक सीमित होकर रह गया है। उनके अनुसार प्रशासन के करीबी लोगों के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध हैं, जबकि संतों और साधुओं की उपेक्षा की जा रही है।
घटना का उल्लेख करते हुए शंकराचार्य ने बताया कि मौनी अमावस्या की सुबह वे अपने शिष्यों और श्रद्धालुओं के साथ पालकी द्वारा संगम स्नान के लिए प्रस्थान कर रहे थे। इसी दौरान गंगा तट से कुछ ही दूरी पर पुलिस अधिकारियों ने उन्हें पालकी से उतरने का निर्देश देते हुए आगे बढ़ने से रोक दिया। उन्होंने इसे शंकराचार्य पद की मर्यादा के प्रतिकूल और अपमानजनक बताया। आरोप है कि इसके बाद सादे कपड़ों में मौजूद कुछ लोगों ने पालकी समेत उन्हें विभिन्न स्थानों पर घुमाते हुए अंततः एक स्थान पर छोड़ दिया।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान उनके शिष्यों और भक्तों के साथ दुर्व्यवहार किया गया तथा कुछ लोगों के साथ मारपीट की गई, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उनका कोई धरना या प्रदर्शन नहीं है, बल्कि वे केवल अपने धार्मिक अधिकार के तहत स्नान की अनुमति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
शंकराचार्य के मीडिया प्रवक्ता शैलेन्द्र योगी सरकार ने बताया कि महाराज अपने निर्णय पर दृढ़ हैं और अब भी पालकी पर बैठे हुए प्रशासन से स्नान की अनुमति मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

