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आपसी मतभेद त्यागें, बांग्लादेश में पीड़ित हिंदुओं की चिंता करें: अधोक्षजानंद देवतीर्थ

प्रयागराज (आलोक गुप्ता). गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ महाराज ने देशभर के धर्माचार्यों से आह्वान किया है कि वे आपसी मतभेदों और आडंबर से ऊपर उठकर बांग्लादेश में प्रताड़ित हिंदू समुदाय की सुरक्षा के लिए ठोस पहल करें। उन्होंने कहा कि यह समय परस्पर विवादों में उलझने का नहीं, बल्कि सनातन परंपरा के मूल उद्देश्य—रक्षा और करुणा—को साकार करने का है।

माघ मेला क्षेत्र के त्रिवेणी मार्ग स्थित अपने शिविर में शनिवार को बांग्लादेश के हिंदुओं की सुरक्षा के लिए आयोजित विशेष वैदिक अनुष्ठान और महायज्ञ के उपरांत मीडिया से बातचीत करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि पड़ोसी देश में हिंदुओं की जान और सम्मान गंभीर संकट में है। उन्होंने बताया कि इसी पीड़ा के निवारण और शांति की कामना के लिए यह वैदिक अनुष्ठान संपन्न कराया गया।

शंकराचार्य अधोक्षजानंद देवतीर्थ ने कहा कि बांग्लादेश में रहने वाले सनातन धर्मावलंबी आज अपने ही घरों, सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षित नहीं हैं। उनके साथ हिंसा और अत्याचार की घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे हालात में विश्वभर के हिंदुओं और विशेष रूप से भारत के धर्मगुरुओं को एक स्वर में उनकी रक्षा के लिए आगे आना चाहिए।

उन्होंने केंद्र सरकार से भी आग्रह किया कि वह कूटनीतिक और राजनीतिक स्तर पर सभी उपलब्ध साधनों का उपयोग कर बांग्लादेश सरकार पर दबाव बनाए, ताकि वहां अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश के विभाजन को सात दशक से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन इसके बावजूद वहां का हिंदू समाज लंबे समय से उत्पीड़न का सामना कर रहा है और फिर भी वह अपनी सनातन परंपरा से दृढ़ता से जुड़ा हुआ है।

अपने अनुभव साझा करते हुए शंकराचार्य ने बताया कि वर्ष 2023 में उन्होंने स्वयं बांग्लादेश का दौरा किया था। वहां आज भी शक्तिपीठों, मठों, मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों की उपस्थिति सनातन परंपरा की जीवंतता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि लगभग 135 वर्षों के अंतराल के बाद किसी शंकराचार्य का वहां पहुंचना बांग्लादेश के हिंदुओं के लिए भावनात्मक क्षण था, और उन्हें जो सम्मान मिला, वह आद्य शंकराचार्य की तपस्या और सनातन के प्रति त्याग का परिणाम है।

शंकराचार्य ने यह भी मांग की कि जो हिंदू बांग्लादेश से भारत आना चाहते हैं, उन्हें मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सम्मान और नागरिकता का संरक्षण दिया जाए। उन्होंने अपने अनुयायियों और धर्माचार्यों से अपील की कि वे आद्य शंकराचार्य के अद्वैत दर्शन और सनातन एकता के संदेश को आत्मसात करें तथा एकजुट होकर सनातन धर्म की मर्यादा और ध्वजा को विश्वपटल पर प्रतिष्ठित करें।

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