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UPकी 11 विभूतियों को राष्ट्रीय अलंकरण, वायलिन साधिका एन. राजम को पद्म विभूषण

लखनऊ (विजय मिश्र). गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार द्वारा घोषित पद्म पुरस्कार-2026 की सूची में उत्तर प्रदेश की 11 विशिष्ट हस्तियों को स्थान मिला है। कला, विज्ञान, चिकित्सा, कृषि, पुरातत्व, साहित्य और खेल जैसे विविध क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए इन विभूतियों को सम्मानित किया जाएगा। कला जगत की प्रख्यात शास्त्रीय वायलिन वादक डॉ. एन. राजम को देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से अलंकृत किए जाने की घोषणा की गई है, जबकि दस अन्य को पद्म श्री प्रदान किया जाएगा।

हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में वायलिन को नई पहचान देने वाली डॉ. एन. राजम को उनके दशकों लंबे योगदान के लिए यह सर्वोच्च सम्मान मिलेगा। वर्ष 1938 में जन्मीं एन. राजम ने वायलिन पर गायन शैली को विकसित कर उसे स्थापित किया, जिससे यह वाद्य यंत्र हिंदुस्तानी संगीत की मुख्यधारा में सशक्त रूप से शामिल हुआ। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के परफॉर्मिंग आर्ट्स संकाय में लगभग चार दशक तक अध्यापन किया और विभागाध्यक्ष तथा डीन के रूप में भी सेवाएं दीं। इससे पूर्व उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है।

पद्म श्री सम्मान के लिए चयनित शिल्पगुरु चिरंजी लाल यादव ने मुरादाबाद की पीतल नक्काशी कला को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। दशकों से इस पारंपरिक कला से जुड़े चिरंजी लाल ने न केवल उत्कृष्ट कारीगरी प्रस्तुत की, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से हजारों कारीगरों को प्रशिक्षित कर हस्तशिल्प को आजीविका का सशक्त माध्यम बनाया। उनके कार्यों ने भारतीय शिल्प परंपरा को नई ऊंचाई दी है।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय से जुड़े वैज्ञानिक प्रो. श्याम सुंदर को कालाजार जैसी घातक बीमारी के उन्मूलन की दिशा में किए गए अनुसंधान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया जाएगा। उनके नेतृत्व में हुए शोध से इस बीमारी के संक्रमण फैलाने वाले संवाहक की पहचान में ऐतिहासिक सफलता मिली, जिसे वैश्विक स्तर पर सराहा गया। उन्हें इससे पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिल चुके हैं।

कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मुरादाबाद जिले के किसान रघुपत सिंह को मरणोपरांत पद्म श्री से सम्मानित करने की घोषणा की गई है। उन्होंने लुप्तप्राय हो चुकी दर्जनों सब्जी प्रजातियों को पुनर्जीवित किया और सौ से अधिक नई किस्में विकसित कर खेती को लाभकारी उद्यम के रूप में स्थापित करने का कार्य किया।

इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश से अनिल कुमार रस्तोगी (कला), अशोक कुमार सिंह (विज्ञान), बुद्धा रश्मि मणि (पुरातत्व), केवल कृष्ण ठकराल (चिकित्सा), मंगला कपूर (साहित्य), प्रवीण कुमार (खेल) और राजेंद्र प्रसाद (चिकित्सा) को पद्म श्री सम्मान के लिए चुना गया है।

पद्म पुरस्कार 2026 की यह सूची उत्तर प्रदेश की बौद्धिक, सांस्कृतिक और सामाजिक समृद्धि का प्रतीक बनकर उभरी है, जो समर्पण, साधना और नवाचार को राष्ट्रीय मंच पर सम्मानित करती है।

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