अन्याय के विरुद्ध अडिग रहेंगे, न्याय की प्रतीक्षा रहेगी: अविमुक्तेश्वरानंद

शंकराचार्य ने माघ मेला से किया प्रस्थान
प्रयागराज (आलोक गुप्ता). ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अन्याय से किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं किया जाएगा और सत्य के पक्ष में न्याय की प्रतीक्षा की जाएगी। संगमनगरी प्रयागराज से प्रस्थान से पूर्व उन्होंने कहा कि यहां घटित घटनाओं ने उन्हें भीतर तक आहत किया है, जिसके कारण वे बिना संगम स्नान किए ही नगर छोड़ने को विवश हुए।
बुधवार को मीडिया से संवाद करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि प्रयागराज से विदा लेते समय उनके पास कहने के लिए बहुत कुछ है, लेकिन मन अत्यंत व्यथित है। उन्होंने कहा कि वे इस धरती से जाते हुए भी सत्य की आवाज़ छोड़कर जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से अंतिम समय में भेजे गए प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि उन्हें ससम्मान स्नान कराने की बात कही गई, लेकिन यह प्रस्ताव उस मूल प्रश्न का समाधान नहीं करता था, जिसके लिए वे पिछले दस दिनों से संघर्षरत थे।
उन्होंने कहा कि यदि ऐसे समय में स्नान स्वीकार कर लिया जाता तो यह उनके उन भक्तों के साथ अन्याय होता, जो पूरे आंदोलन के दौरान उनके साथ खड़े रहे। इसी कारण भारी मन से उन्होंने उस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया और प्रयागराज छोड़ने का निर्णय लिया।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि जो परिस्थितियां आज उत्पन्न की जा रही हैं, वे इतिहास के कठिन दौर की याद दिलाती हैं। उन्होंने कहा कि संतों के सम्मान को लेकर दिए जाने वाले बयानों और धरातल पर होने वाले व्यवहार में स्पष्ट विरोधाभास दिखाई देता है। यह दोहरा आचरण सनातन समाज स्वीकार नहीं करेगा।
पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने कुछ क्षण का मौन रखकर प्रार्थना की और कहा कि जो लोग अपमान के लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें दंड अवश्य मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके संस्थान और परंपरा को कमजोर करने का प्रयास किया गया है और इसके पीछे प्रशासनिक नहीं, बल्कि शासन स्तर की जिम्मेदारी है।
शंकराचार्य ने कहा कि संन्यासी के लिए मान या अपमान व्यक्तिगत विषय नहीं होता, लेकिन जब मामला न्याय और अन्याय का हो, तो चुप रहना संभव नहीं। उन्होंने संकल्प दोहराया कि सनातन धर्म और उसके अनुयायियों को न्याय दिलाने के लिए वे हर आवश्यक कदम उठाएंगे।



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